नयी दिल्ली। जेट एयरवेज़ में लगता है कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। कंपनी ने अपने तिमाही नतीजों को पेश नहीं किया है। वहीं भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने जेट एयरवेज के अप्रैल-जून तिमाही परिणामों की घोषणा में देरी को संज्ञान लिया है। जबकि इससे पहले बीएसई और एनएसई ने भी इस बाबत कंपनी से जानकारी देने को कहा है। दूसरी ओर सरकार ने भी कहा है कि वह इस मामले पर कड़ी नज़र रखे है।
कल जेट एयरवेज के निदेशक मंडल की बैठक हुई लेकिन कंपनी ने अपने तिमाही परिणामों की घोषणा नहीं की क्योंकि उसकी ऑडिट समिति ने अंकेक्षण पर आपत्ति दर्ज करायी थी। इसे लेकर कंपनी के बारे में वित्तीय जगत की चिंताएं बढ़ गई हैं। विमानन कंपनी की ऑडिट समिति द्वारा परिणामों को लेकर दर्ज करायी गई आपत्ति के बाद परिणाम जारी करने में देरी के मामले में सेबी सूचना के खुलासे या कंपनी के कामकाज से जुड़े नियमों (कारपोरेट गर्वनेंस) के संभावित उल्लंघन को देख रहा है। इसे लेकर वह शेयर बाजारों से भी संपर्क बनाए हुए है।
इससे पहले बंबई शेयर बाजार (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने भी इस मामले में कंपनी से ‘विशेष जानकारियां’ उपलब्ध कराने के लिए कहा। साथ ही कंपनी से पूरी उपलब्ध जानकारी मुहैया कराने के लिए भी कहा है जिसका पालन सूचीबद्धता समझौते के नियम-30 के तहत अनिवार्य है। नियम-30 सूचना के खुलासे से जुड़ा है।
दूसरी ओर नागर विमानन मंत्रालय ने आज कहा कि वह जेट एयरवेज से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है। नागर विमानन सचिव आर.एन.चौबे ने कहा, ‘‘हम घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं।’’ हालांकि उन्होंने कहा कि मंत्रालय कंपनी का वित्तीय आडिट कराने के बारे में नहीं सोच रहा है। वह जेट एयरवेज की वित्तीय समस्याओं तथा तिमाही परिणाम में देरी के बारे में पूछे गये सवालों का जवाब दे रहे थे।
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