नई दिल्ली। गुरुवार की शाम यूरोपीयन सेंट्रल बैंक (ECB) ने दो बड़े फैसले लिए। पहला मुख्य नीतिगत दरों को घटाकर 0% करना और दूसरा बैंक में पैसा जमा करने पर -0.4% ब्याज वसूलना। दोनों ही फैसलों के पीछे ECB की मंशा बाजार में आसान और सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने की है, जिससे जनता तक सस्ता कर्ज पहुंचे और अर्थव्यवस्था में मांग उत्पन्न हो सके। दरअसल, सस्ता कर्ज देकर डिमांड को बूस्ट करने का यह तरीका पुराना और सिद्ध है।
मतलब क्या हुआ इस फैसले का?
मतलब सीधा है कि यूरोप की जनता अगर बैंक में पैसा जमा करेगी तो बैंक उसको ब्याज नहीं देंगे बल्कि पैसा रखने के लिए उल्टा 0.4 फीसदी की दर से ब्याज वसूलेंगे। दूसरे फैसले का मतलब यह हुआ कि घर, गाड़ी, पर्सलन आदि लोन यूरोप की जनता को आसानी से और बिना किसी ब्याज दर पर मिल जाएंगे।
ECB के फैसले के बाद होगा क्या?
ECB की ओर से लिए गए फैसले से यूरोप की जनता और व्यापारियों को तमाम तरह के कर्ज आसान शर्तों पर मिल सकेंगे। साथ ही बैंकों में पैसा रखना जब घाटे का सौदा हो जाएगा तो जनता बैंकों से पैसा निकालकर उसको खर्च करेगी। इस तरह जनता की ओर से उपभोग बढ़ जाने से इकोनॉमी में डिमांड और महंगाई बढ़ेगी। यूरोप की अर्थव्यवस्था को संकट से उभारने के लिए मांग और महंगाई ये दोनों ही संजीवनी जैसे हैं।
इससे क्या यूरोप को कोई नुकसान होगा?
जी हां, आसानी से नकदी उपलब्ध कराने की वजह से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो का दबदबा कम होगा। मतलब डॉलर समेत दुनिया की तमाम करंसियों के मुकाबले यूरो की चमक फीकी पड़ेगी। जिससे जहां एक ओर यूरो में आय अर्जित करने वाली कंपनियों को नुकसान होगा वहीं दूसरी देश की आर्थिक सेहत पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। लेकिन हां, यूरोप के शेयर बाजार निश्चित तौर पर इस फैसले के बाद कुछ दिनों के लिए अच्छी तेजी दिखा सकते हैं।
क्या भारत या दुनिया के अन्य देशों पर भी इसका कोई असर होगा?
भारत समेत दुनिया के तमाम उन देशों को इसका फायदा होगा, जहां कंपनियां यूरो में कर्ज लेती हैं। उदाहरण से समझिए अगर भारत की कोई कंपनी FCCB के जरिये यूरोप के किसी बैंक से कर्ज लेती हैं तो उसको फ्री में यह कर्ज मिल जाएगा। जिससे उस कंपनी पर पड़ने वाली ब्याज की मार से उसे राहत मिलेगी। ऐसे में उन कंपनियों पर सकारात्मक असर देखने को जरूर मिलेगा, जो यूरो में कर्ज उठाती हैं। साथ ही यूरोप को एक्सपोर्ट करने वाले देशों को इसका फायदा मिलेगा क्योंकि डिमांड बढ़ने पर इन देशों के ऑर्डर भी बढ़ जाएंगे।
निवेशकों के लिहाज से कुछ अहम है क्या इस फैसले में?
केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया बता रहे हैं कि ECB के फैसले से यूरो कमजोर होगा, जिससे डॉलर को मजबूती मिलेगी। डॉलर इंडेक्स में तेजी आने के कारण सोने की कीमतों में बढ़त देखने को मिल सकती है। जिसका असर भारतीय बाजार पर भी होगा। साथ ही शेयर बाजार में तेजी आने पर दुनियाभर के बाजार पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
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