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CGHS Scheme Rule Change: केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना में हो गया बड़ा बदलाव, अस्पतालों के लिए नई रेट स्ट्रक्चर लागू

यह व्यापक बदलाव सीजीएचएस के तहत चिकित्सा उपचार की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इसके सफल कार्यान्वयन के लिए समय पर दावों का निपटान और अस्पतालों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।

पिछले कई सालों से पुरानी दरों के कारण अस्पतालों और सरकार के बीच मतभेद होते रहे हैं।- India TV Paisa Image Source : PIXABAY पिछले कई सालों से पुरानी दरों के कारण अस्पतालों और सरकार के बीच मतभेद होते रहे हैं।

बीते 13 अक्टूबर को केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के मूल्य निर्धारण ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव को आधिकारिक तौर पर लागू किया गया। यह बदलाव सीजीएचएस के तहत रजिस्टर्ड अस्पतालों में करीब 2,000 चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए नई दरों की शुरुआत करता है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है, लेकिन पिछले कई सालों से पुरानी दरों के कारण अस्पतालों और सरकार के बीच मतभेद होते रहे हैं। cnbctv18 की खबर के मुताबिक, कई अस्पतालों ने इन अव्यवहारिक दरों के कारण सीजीएचएस मरीजों को समय पर इलाज देने में या तो देरी की या उनका इलाज स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। अब, नए मूल्य निर्धारण ढांचे के लागू होने से इस प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार की संभावना है। इसका प्रभाव न केवल सीजीएचएस लाभार्थियों, बल्कि अस्पतालों पर भी पड़ने वाला है।

CGHS Scheme में क्या बदला है?

नए ढांचे के तहत बहुस्तरीय मूल्य निर्धारण प्रणाली को लागू किया गया है। अब चिकित्सा प्रक्रियाओं की दरें विभिन्न कारकों के आधार पर तय की जाएंगी:

  • अस्पताल की मान्यता (एनएबीएच/एनएबीएल मान्यता प्राप्त अस्पताल बनाम गैर-मान्यता प्राप्त)
  • सुविधा का प्रकार (सामान्य बनाम सुपर-स्पेशलिटी)
  • शहर का वर्गीकरण (महानगर बनाम टियर-2/टियर-3 शहर)
  • रोगी वार्ड पात्रता

कुछ प्रमुख संशोधन ये भी हुए 

  • मान्यता प्राप्त अस्पतालों को मानक दरों पर भुगतान किया जाएगा।
  • गैर-मान्यता प्राप्त अस्पतालों को 15% कम प्रतिपूर्ति मिलेगी।
  • सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों को 15% अधिक दरें प्राप्त होंगी।
  • महानगरों की तुलना में टियर-2 और टियर-3 शहरों के अस्पतालों को 10-20% कम दरें मिलेंगी।

मरीजों के लिए इसका क्या मतलब है?

नई दरों के लागू होने से अस्पतालों की सीजीएचएस के तहत अधिक भागीदारी की संभावना बढ़ेगी। उच्च प्रक्रिया भुगतान के साथ, अस्पताल अब सीजीएचएस लाभार्थियों को अधिक आसानी से स्वीकार करने के लिए तैयार हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सुपर-स्पेशलिटी उपचार के लिए अस्पतालों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे इन उपचारों तक पहुंच बेहतर होगी। हालांकि, सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए कैशलेस उपचार की उपलब्धता अभी भी सरकार द्वारा समय पर रीइम्बर्समेंट करने पर निर्भर करेगी, जो लंबे समय से एक चिंता का विषय रहा है।

अस्पतालों पर इसका असर

विश्लेषकों के अनुसार, नए ढांचे के लागू होने से उच्च-मूल्य वाले उपचारों में 25-30% वृद्धि हो सकती है, विशेष रूप से सुपर-स्पेशलिटी उपचारों में। मैक्स हेल्थकेयर, नारायण हेल्थ, फोर्टिस और यथार्थ हॉस्पिटल्स जैसी निजी स्वास्थ्य सेवा कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना है, क्योंकि इन अस्पतालों में सीजीएचएस से जुड़े मरीजों की संख्या अधिक है। हालांकि, यह बदलाव अस्पतालों के कैश फ्लो की विजिबिलिटी को बढ़ा सकता है, लेकिन निपटान में देरी से लाभ की कमी हो सकती है।

आगे क्या हो सकता है असर 

आने वाले दिनों में, संशोधित दरों और वार्ड पात्रता नियमों की अस्पताल-वार सूची जारी की जाएगी। सीजीएचएस लाभार्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके चुने हुए अस्पताल ने नई दर संरचना को अपनाया है या नहीं, क्योंकि कुछ गैर-मान्यता प्राप्त केंद्र कम दरों के कारण योजना से बाहर भी हो सकते हैं। इस बदलाव की सफलता अंततः दावों के त्वरित निपटान पर निर्भर करेगी, जो पिछले प्रयासों में एक बड़ा मुद्दा था और जिसके समाधान की आवश्यकता थी।

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