आपको यह जानकर हैरान होगी कि बीते महीने यानी दिसंबर 2025 में देश भर में कुल 6,890 फ्लाइट्स कैंसिल हुईं थी। इसके चलते 9,66,864 यात्री प्रभावित हुए। सबसे अधिक कैसिंल फ्लाइट्स इंडिगो की रही, जिसकी कुल रद्द हुई फ्लाइट्स में भागीदारी 82 प्रतिशत हिस्सा थी। यह जानकारी आधिकारिक आंकड़ों में सामने आई है। इंडिगो को दिसंबर की शुरुआत में गंभीर ऑपरेशनल समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद सिविल एविएशन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयरलाइन के विंटर शेड्यूल को 10% तक घटा दिया। डीजीसीए ने एयरलाइन पर कुल 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया और अन्य नियामक कार्रवाई की।
क्या थे मुख्य कारण
राज्य मंत्री (सिविल एविएशन) मुरलीधर मोहल ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि इस परेशानी के मुख्य कारण थे:
- ऑपरेशंस का अत्यधिक अनुकूलन
- नियामक तैयारियों की कमी
- सिस्टम सॉफ्टवेयर सपोर्ट में खामियां
- IndiGo की प्रबंधन और ऑपरेशनल नियंत्रण में कमियां
इसके अलावा मंत्री ने कहा कि दिसंबर में खराब मौसम की वजह से अन्य एयरलाइंस ने भी कई फ्लाइट्स रद्द कीं।
कैंसिल फ्लाइट्स और प्रभावित पैसेंजर
एयरलाइंस अनुसार रद्द फ्लाइट्स और प्रभावित यात्रियों की संख्या इस प्रकार रही:
- IndiGo: 5,689 फ्लाइट्स रद्द, 9,02,384 यात्री प्रभावित
- Air India Group: 924 फ्लाइट्स रद्द, 43,278 यात्री प्रभावित
- SpiceJet: 79 फ्लाइट्स रद्द, 11,929 यात्री प्रभावित
- Akasa Air: 39 फ्लाइट्स रद्द, 5,673 यात्री प्रभावित
- Alliance Air (सरकारी): 63 फ्लाइट्स रद्द, 2,463 यात्री प्रभावित
- IndiaOne Air: 71 फ्लाइट्स रद्द, 408 यात्री प्रभावित
- Star Air: 17 फ्लाइट्स रद्द, 386 यात्री प्रभावित
- Fly91: 8 फ्लाइट्स रद्द, 343 यात्री प्रभावित
DGCA के आंकड़े दर्शाते हैं कि दिसंबर में देश की वायु सेवा में बड़े पैमाने पर व्यवधान और संचालन संबंधी चुनौतियां देखने को मिलीं।
भारत का एविएशन सेक्टर लगातार बढ़ रहा आगे
पिछले एक दशक में भारत का हवाई परिवहन क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट बन चुका है। एयरपोर्ट्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2014 में देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे, जो 2025 तक बढ़कर 163 हो गए हैं। सरकार का विज़न है कि भारत अपनी आज़ादी के 100 साल पूरे होने तक यानी 2047 तक एयरपोर्ट्स की संख्या 350-400 तक ले जाएगा। एविएशन सेक्टर न केवल यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से बढ़ते सेक्टर्स में से एक भी बन गया है। एयर ट्रांसपोर्ट सेवाओं के अलावा, यह टूरिज़्म, ट्रेड, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
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