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भारत ने चीन समेत बाकी पड़ोसी देशों के लिए आसान किए FDI के नियम, सरकार ने शर्तों में दी ढील

भारत में अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 तक आए कुल एफडीआई इक्विटी फ्लो में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत (2.51 अरब अमेरिकी डॉलर) है और वे 23वें स्थान पर है।

FDI, foreign direct investment, china, pakistan, bangladesh, bhutan, india, cabinet committee- India TV Paisa Image Source : PIXABAY चीन को निर्यात में गिरावट, आयात में बढ़ोतरी

सरकार ने मंगलवार को चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर साझा करने वाले सभी देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को आसान बना दिया है। सूत्रों ने कहा कि इस संबंध में 2020 के प्रेस नोट-3 में बदलाव किया गया है। ये फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। इस प्रेस नोट के तहत जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार से अनिवार्य रूप से मंजूरी लेने की जरूरत है। पीटीआई के सूत्रों ने ये जानकारी दी। 

भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद खराब हो गए थे संबंध

भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान हैं। भारत में अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 तक आए कुल एफडीआई इक्विटी फ्लो में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत (2.51 अरब अमेरिकी डॉलर) है और वे 23वें स्थान पर है। जून, 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गई थी। इसके बाद भारत ने टिकटॉक, वीचैट और अलीबाबा के यूसी ब्राउजर जैसे 200 से ज्यादा चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, भारत को चीन से बहुत कम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है, फिर भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। 

चीन को निर्यात में गिरावट, आयात में बढ़ोतरी

चीन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। भारत का चीन को निर्यात 2024-25 में 14.5 प्रतिशत घटकर 14.25 अरब डॉलर रहा, जबकि 2023-24 में ये 16.66 अरब डॉलर था। हालांकि, आयात 2024-25 में 11.52 प्रतिशत बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 में ये 101.73 अरब डॉलर था। व्यापार घाटा 2023-24 के 85 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर हो गया। भारत का चीन को निर्यात चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान 38.37 प्रतिशत बढ़कर 15.88 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 13.82 प्रतिशत बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया और व्यापार घाटा 92.3 अरब डॉलर रहा।

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