भारत का डिजिटल गणतंत्र: ये 7 प्लेटफॉर्म दे रहे भारत की इकोनॉमी को पावर, बदल दी है सूरत
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आज भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में जबरदस्त भूमिका निभा रहा है। इसने राह आसान और तेज कर दिए हैं। पूरी दुनिया में भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म की चर्चा होती है।

भारत का गणतंत्र अब कागजों और दस्तावेजों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हर नागरिक की मोबाइल स्क्रीन पर जीवंत हो चुका है। यूपीआई, आधार, डिजीलॉकर, ओएनडीसी, फास्टैग, जीईएम और अकाउंट एग्रीगेटर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है, बल्कि बिज़नेस और गवर्नेंस की पूरी संरचना को डिजिटल रूप से बदल दिया है। कैशलेस भुगतान, पेपरलेस प्रक्रियाएं और प्लेटफॉर्म-आधारित मॉडल के जरिए ये सिस्टम आम लोगों, स्टार्टअप्स और सरकार को एक साझा टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में जोड़ रहे हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर यही सवाल सबसे अहम है-क्या भारत अब दुनिया की पहली वास्तविक डिजिटल रिपब्लिक की ओर बढ़ चुका है?
आधार: डिजिटल पहचान की रीढ़
आधार ने भारत में पहचान की परिभाषा ही बदल दी है। एक यूनिक डिजिटल आईडी के ज़रिए आधार ने सब्सिडी, बैंकिंग, मोबाइल कनेक्शन, टैक्सेशन और सरकारी योजनाओं को सीधे नागरिकों से जोड़ दिया। बायोमेट्रिक और डिजिटल वेरिफिकेशन की वजह से फर्जीवाड़े पर लगाम लगी, लीकेज कम हुआ और सरकारी खर्च अधिक लक्षित हुआ। डिजिटल इकोनॉमी के इस दौर में आधार सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि भारत के पूरे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की आधारशिला बन चुका है।
UPI ने ला दी कैशलेस क्रांति
यूपीआई ने भारत में पैसे के लेन-देन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। मोबाइल फोन के जरिए सेकेंडों में होने वाला सुरक्षित भुगतान अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि गांवों और छोटे कारोबारियों तक पहुंच चुका है। दुकानदार से लेकर स्टार्टअप और सरकारी भुगतान तक, यूपीआई ने ट्रांजैक्शन को आसान, तेज और सस्ता बना दिया है। डिजिटल भुगतान के इस सिस्टम ने न सिर्फ कैश पर निर्भरता घटाई है, बल्कि फाइनेंशियल इनक्लूजन को बढ़ावा देकर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ताकत दी है।
DigiLocker एक शानदार प्लेटफॉर्म
पेपरलेस गवर्नेंस के आइडिया को ध्यान में रखते हुए, डिजिलॉकर डिजिटल रूप से डॉक्यूमेंट्स और सर्टिफिकेट जारी करने और वेरिफाई करने का एक शानदार प्लेटफॉर्म है, जिससे फिजिकल डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल खत्म हो जाता है। डिजिलॉकर ने पेपरलेस गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाया है, यानी इसने नागरिकों और विभागों को पेपर-आधारित प्रक्रियाओं से पेपरलेस प्रक्रियाओं की ओर बढ़ने में मदद की है। इसने नागरिकों को फोटो पहचान पत्र, शिक्षा, परिवहन, वित्त और नगर पालिका से संबंधित जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध कराए हैं, जिससे उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त बनाया गया है।
ONDC: डिजिटल कॉमर्स को लोकतांत्रिक बनाने की क्रांति
ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स यानी ONDC भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला रहा है। यह एक खुला और इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म है, जो छोटे-छोटे दुकानदारों, स्थानीय व्यापारियों और MSMEs को बड़े ई-कॉमर्स दिग्गजों के बराबर अवसर प्रदान करता है। ONDC के जरिये कोई भी विक्रेता बिना किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर हुए, कई buyer apps, seller apps और logistics providers के नेटवर्क से जुड़ सकता है। इससे बाजार में एकाधिकार टूट रहा है और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। छोटे व्यवसाय अब देशभर के ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं, बिना भारी कमीशन या प्लेटफॉर्म नियमों के बोझ के। डिजिटल इंडिया की इस सोच में ONDC आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भर भारत का एक मजबूत प्रतीक बनकर उभर रहा है- जहां डिजिटल बाजार सबके लिए खुला और समान अवसरों वाला हो।
FASTag: हाईवे की रफ्तार से अर्थव्यवस्था तक की स्पीड
फास्टैग ने भारत के टोल सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और बिना रुकावट वाला बना दिया है। अब वाहन टोल प्लाजा पर रुकते नहीं – बस ऑटोमैटिक टोल कटौती हो जाती है, जिससे संपर्करहित और तेज आवाजाही संभव हुई।ट्रैफिक जाम में भारी कमी आई है – पहले जहां टोल पर औसत वेटिंग समय 10-15 मिनट था, अब यह सेकंडों में सिमट गया है। इससे सालाना करोड़ों लीटर ईंधन की बचत हो रही है और CO2 उत्सर्जन में भी कमी आई है। 2025 के आखिर तक 11.73 करोड़ से ज्यादा FASTag जारी हो चुके हैं।
GeM: सार्वजनिक खरीद में डिजिटल पारदर्शिता
सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM सरकारी विभागों, संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों को रोजमर्रा में उपयोग होने वाली वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है। GeM का मकसद सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, समय और लागत की बचत करना और सरकारी खर्च को अधिक प्रभावी बनाना है। ई-बोली, रिवर्स ई-नीलामी और मांग एकत्रीकरण जैसे डिजिटल टूल्स के ज़रिए यह प्लेटफॉर्म सरकारी खरीदारों को बेहतर कीमत पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद करता है, जिससे सरकारी खरीद प्रणाली अधिक तेज़, प्रतिस्पर्धी और जवाबदेह बन रही है।
अकाउंट एग्रीगेटर: डेटा से बन रहा फाइनेंशियल भरोसा
अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क ने भारत में वित्तीय डेटा साझा करने की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित, उपयोगकर्ता-नियंत्रित और पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। RBI द्वारा नियंत्रित इस ओपन सिस्टम के तहत व्यक्ति या व्यवसाय अपनी स्पष्ट सहमति से बैंक अकाउंट, म्यूचुअल फंड, बीमा, पेंशन और अन्य वित्तीय जानकारी को विभिन्न संस्थानों के बीच आसानी से शेयर कर सकते हैं – बिना फिजिकल डॉक्यूमेंट्स या बार-बार KYC की जरूरत के। इसका सबसे बड़ा फायदा क्रेडिट एक्सेस में आया है। पहले जहां लोन अप्रूवल के लिए फिजिकल स्टेटमेंट्स, ITR आदि जमा करने पड़ते थे, अब अकाउंट एग्रीगेटर के जरिए रीयल-टाइम, वेरिफाइड डेटा उपलब्ध होने से लोन प्रोसेस तेज और सस्ता हो गया है।