अक्टूबर में घटकर 0.25 प्रतिशत हुई खुदरा महंगाई दर, कई सालों के निचले स्तर पर मुद्रास्फीति
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाली खाने-पीने की चीजों की कीमतें सितंबर के -2.28% की तुलना में घटकर -5.02% रह गईं।

अक्टूबर, 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 0.25 प्रतिशत रही, जो पिछले साल अक्टूबर की तुलना में 119 बेसिस पॉइंट्स कम है। खाने-पीने की चीजों के दाम घटने की वजह से महंगाई में काफी गिरावट आई है और अक्टूबर में ये करीब एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच गई। बताते चलें कि सितंबर, 2025 में खुदरा महंगाई दर 1.54 प्रतिशत दर्ज की गई थी। अक्टूबर लगातार चौथा महीना रहा, जब महंगाई यानी मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मध्यम अवधि के लक्ष्य 4% और लगातार 7 महीनों से केंद्रीय बैंक की 6% की सहनशीलता सीमा से नीचे रही है।
इन चीजों की कीमतों में गिरावट की वजह से गिरी महंगाई
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाली खाने-पीने की चीजों की कीमतें सितंबर के -2.28% की तुलना में घटकर -5.02% रह गईं। अक्टूबर 2025 में खाद्य मुद्रास्फीति वर्तमान सीपीआई श्रृंखला में सबसे कम है। सरकार ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि अक्टूबर के दौरान मुख्य मुद्रास्फीति और खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट मुख्य रूप से जीएसटी में कटौती, अनुकूल आधार प्रभाव, तेल एवं वसा, सब्जियों, फलों, अंडों, जूते-चप्पल, अनाज और उत्पादों, परिवहन और संचार आदि की महंगाई में गिरावट के कारण हुई है।"
अगले महीने फिर रेपो रेट में कटौती कर सकता है आरबीआई
महंगाई में तेजी से गिरावट आ रही है, जबकि ताजा आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून तिमाही में लगभग 8% बढ़ी है और आरबीआई द्वारा अगले महीने फिर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। इसी बीच, ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर -4.85% और शहरी क्षेत्रों में -5.18% रही। फ्यूल और लाइट कैटेगरी के लिए साल-दर-साल मुद्रास्फीति दर अक्टूबर में 1.98% दर्ज की गई।
भोजन के खर्च में कटौती कर रहे हैं औसत भारतीय परिवार
सब्जियों की कीमतों में सालाना आधार पर लगातार 6 महीनों से डबल डिजिट में गिरावट आई है, जिससे CPI में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाली खाद्य मुद्रास्फीति कंट्रोल में है। हालांकि, फरवरी से मुद्रास्फीति RBI के 4% लक्ष्य से नीचे रही है, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ये घरेलू खर्च के पैटर्न में बदलाव को छुपाती है। 2023-24 के लिए घरेलू उपभोग व्यय सर्वे से पता चला है कि औसत भारतीय परिवार के बजट में भोजन का हिस्सा कम हुआ है।