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यूरोपिय यूनियन और भारत के बीच हो रहे FTA को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' क्यों कहा गया? होगी एतिहासिक डील

यूरोपिय यूनियन और भारत के बीच होने जा रहा यह समझौता चार सालों में भारत का नौवां फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA होगा, जो ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और दूसरे देशों के साथ हुए कई समझौतों के बाद होने जा रहा है।

25 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में एक मीटिंग के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ यूरोपियन काउंसिल क- India TV Paisa Image Source : PTI 25 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में एक मीटिंग के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन।

यूरोपिय यूनियन और भारत के बीच होने जा रहे मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को दोनों पक्षों की तरफ से 'मदर ऑफ ऑल डील्स'  कहकर पुकारा गया। दरअसल, यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल दोनों ने इसे "सभी डील्स की जननी" कहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि, यह इस बात पर जोर देता है कि दोनों पक्षों की तरफ से लगभग दो दशकों की कड़ी मोलभाव के बाद बातचीत खत्म होने वाली है, और वे इसे कितना ज़रूरी मानते हैं। आपको बता दें, यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट लेयेन सोमवार, 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि हैं। दोनों देशों के बीच डील की घोषणा 27 जनवरी को होने जा रही है। 

भारत की बढ़ती ताकत: EU के लिए अहम व्यापारिक साझेदारी

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ने यूरोपियन यूनियन यानी EU के लिए इसे एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बना दिया है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के तौर पर, भारत इस साल जापान को पीछे छोड़ते हुए अपने GDP में $4 ट्रिलियन (£2.97 ट्रिलियन) का आंकड़ा पार करने के करीब है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि EU और भारत के बीच मजबूत साझेदारी से लगभग दो अरब लोगों का एक फ्री मार्केट तैयार होगा, जो दुनिया की कुल GDP का लगभग एक चौथाई होगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के साथ सहयोग न केवल व्यापार के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता और संतुलन लाने में भी मदद करेगा।

भारत-यूरोपिय यूनियन के बीच एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट

दिल्ली के ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी GTRI के मुताबिक, भारत ने EU को लगभग 76 अरब डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया, जबकि 61 अरब डॉलर का इंपोर्ट किया, जिससे उसे ट्रेड सरप्लस हुआ, लेकिन 2023 में EU GSP बेनिफिट्स वापस लेने से कई भारतीय प्रोडक्ट्स की कॉम्पिटिटिवनेस कम हो गई। दोनों पक्षों के बीच 2007 में शुरू हुई बातचीत साल 2013 में टैरिफ, बौद्धिक संपदा अधिकार, सतत विकास मानकों (जैसे कार्बन बॉर्डर टैक्स) और कृषि-डेयरी बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों पर अटक गई थी। वैश्विक सप्लाई चेन और भूराजनीतिक तनावों के बीच यूरोपिय यूनियन अब भारत से डील करने जा रहा है। 

डील का आर्थिक और भूराजनीतिक महत्व

भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न केवल आर्थिक बल्कि भूराजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत को यूरोपियन यूनियन के जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज यानी GSP से खोई हुई रियायतें फिर से मिलने की संभावना है। डील के  लागू होने से भारत के परिधान, दवाइयां, स्टील और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे प्रमुख निर्यातों पर शुल्क में कमी आएगी, जिससे भारतीय सामानों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। साथ ही, यह समझौता विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसके लागू होने से भारत का निर्यात 20–30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

खबर के मुताबिक, डील में 90 प्रतिशत से ज्यादा वस्तुओं पर टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से अगले 5 से 10 सालों में खत्म किए जाएंगे। बता दें, भारत करीब 90 प्रतिशत और यूरोपियन यूनियन 95 प्रतिशत तक टैरिफ कटौती चाहता है। मौजूदा समय में यूरोपियन यूनियन में भारतीय सामानों पर औसत टैरिफ 3.8 प्रतिशत है, जबकि भारत में यूरोपियन यूनियन के सामानों पर टैरिफ 9.3 प्रतिशत है।

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