स्टॉक मार्केट में भूचाल, सेंसेक्स 537 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,500 से फिसला, इन प्रमुख स्टॉक्स को झटका
अमेरिका इजरायल का ईरान के साथ जारी संघर्ष शेयर बाजार पर नकारात्मक असर डाल रहा है।
शेयर बाजार ने शु्क्रवार को भारी गिरावट के साथ ओपनिंग की। बीएसई सेंसेक्स सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर एक समय बीएसई सेंसेक्स 537.43 अंक टूटकर 79,478.47 के लेवल पर कारोबार करता दिखा। इसी समय, एनएसई का निफ्टी भी 153.85 अंक गिरकर 24,612.05 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। शुरुआती सत्र के दौरान निफ्टी पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस और विप्रो आज प्रमुख लाभकारी शेयरों में शामिल रहे। इन आईटी और डिफेंस से जुड़े स्टॉक्स में मजबूत खरीदारी देखी गई। दूसरी ओर, घाटे में रहने वाले प्रमुख शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और एलएंडटी शामिल थे।
डॉलर के मुकाबले रुपया 5 पैसे टूटा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच शुक्रवार, 6 मार्च को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ खुला। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 5 पैसे की गिरावट के साथ 91.65 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 91.60 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इससे पहले 5 मार्च को रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से थोड़ा संभला था। बाजार के जानकारों के मुताबिक, उस दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संभावित दखलअंदाजी के चलते रुपये को कुछ सहारा मिला था।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में आई यह मजबूती लंबे समय तक टिकेगी या नहीं, इस पर अभी संदेह बना हुआ है। इसकी एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 84.46 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
भारत से बाहर भी मार्केट पस्त
ईरान के साथ युद्ध की वजह से तेल की कीमत 2024 की गर्मियों के बाद सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंचने के बाद गुरुवार को वॉल स्ट्रीट पर स्टॉक्स गिर गए। S&P 500 0.6 परसेंट गिर गया और इस साल अब तक हुई थोड़ी बढ़त को खत्म कर दिया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज थोड़ी देर के लिए 1,100 पॉइंट्स से ज़्यादा गिरा, फिर 784, या 1.6 परसेंट के नुकसान के साथ बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.3 परसेंट फिसल गया।
यह नुकसान तब हुआ जब दुनिया भर के फाइनेंशियल मार्केट तेल की कीमतों के इशारे पर चलते रहे। वहां तेज बढ़ोतरी से यह चिंता बढ़ रही है कि लंबे समय में तेजी ग्लोबल इकॉनमी को कमजोर कर सकती है, घरों की खर्च करने की क्षमता खत्म कर सकती है और ब्याज दरें बढ़ा सकती हैं।
