क्या AI स्टॉक्स में वैश्विक बिकवाली से भारतीय स्टॉक मार्केट पर भी होगा असर? यहां समझें पूरी बात
विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट AI उछाल के अंत का संकेत नहीं, बल्कि एक स्वस्थ सुधार है। अब निवेशक उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे जिनके पास वास्तविक, टिकाऊ AI समाधान हैं, न कि केवल वे जो AI के प्रचार पर सवार हैं।

लंबे समय से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंपनियों में जारी रिकॉर्ड तोड़ तेज़ी पर इस सप्ताह ब्रेक लग गया। एशिया और अमेरिका के प्रमुख टेक शेयरों में आई भारी गिरावट ने वैश्विक निवेशकों के बीच 'AI बुलबुले' की आशंकाओं को जन्म दिया है। बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, अमेरिका में गुरुवार रात Nvidia, Microsoft, Palantir Technologies, Broadcom और Advanced Micro Devices जैसे प्रमुख AI शेयरों में तेज़ गिरावट आई, जिसने पूरे बाज़ार को अपनी चपेट में ले लिया।
AI शेयरों में भूचाल
Bloomberg AI Index अपने हालिया शिखर से लगभग 4% नीचे आ गया है, जबकि पिछले तीन महीनों में इसमें 34% की ज़बरदस्त उछाल देखी गई थी। अमेरिकी असर से एशियाई बाज़ार भी अछूते नहीं रहे। शुक्रवार की सुबह जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 2.03% तक लुढ़क गया। AI-संबंधित कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज हुई जिनमें SoftBank में 8%, Advantest में 7%, Renesas Electronics में 4%, और Tokyo Electron में 2.17% की गिरावट देखी गई।
गिरावट की मुख्य वजह
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक ताज़ा रिपोर्ट "AI: Bubble, Trouble?" बताती है कि यह करेक्शन (सुधार) इसलिए आया है क्योंकि बाज़ार ने कंपनियों की वास्तविक आय और मुनाफ़े की क्षमता से कहीं ज़्यादा उम्मीदें पाल ली थीं। रिपोर्ट के अनुसार, AI क्षेत्र में चिप निर्माताओं से लेकर सॉफ्टवेयर कंपनियों तक की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में भारी उछाल आया, जो राजस्व और मुनाफ़े की “अवास्तविक उम्मीदों” को दर्शाता है। यह गिरावट निवेशकों की बढ़ती सतर्कता और मुनाफ़ावसूली का स्पष्ट संकेत है।
AI क्रांति का चेहरा OpenAI
उदाहरण के तौर पर, OpenAI — जिसे AI क्रांति का चेहरा माना जाता है- ने अब तक $1–1.5 ट्रिलियन का निवेश आकर्षित किया है। इन निवेशों पर उचित रिटर्न पाने के लिए कंपनी को $200–250 अरब की वार्षिक आय की जरूरत होगी, यह मानते हुए कि 1 अरब यूज़र्स हर महीने $20 का भुगतान करें। हालांकि, फिलहाल OpenAI के केवल लगभग 4 करोड़ भुगतान करने वाले ग्राहक हैं, जो बाजार की अपेक्षाओं और वास्तविक स्थिति के बीच का बड़ा अंतर दिखाता है। कंपनी को उम्मीद है कि वह 2027 तक $100 बिलियन का राजस्व हासिल कर लेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी और पूंजी लागत में वृद्धि के चलते निवेशकों ने मूल्यांकन पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है, जिसके कारण अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे AI-प्रधान बाजारों में तीव्र सुधार देखा गया।
क्या ‘AI बुलबुला’ फूट रहा है?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि यह गिरावट ‘AI बुलबुले’ के अंत की शुरुआत है। हालांकि, कोटक का मानना है कि AI कंपनियों की संभावित आय और लाभ के अनुमान, उपभोक्ताओं की वास्तविक भुगतान क्षमता से मेल नहीं खाते। लंबी अवधि में यह क्षेत्र अब भी परिवर्तनकारी क्षमता रखता है, लेकिन निकट भविष्य में बाजार का रुख वास्तविकता की ओर झुकता दिख रहा है।
भारत को मिल सकता है ‘सेफ हेवेन’ का फायदा
इस वैश्विक गिरावट के बीच भारत को एक “रिलेटिव सेफ हेवेन” (सुरक्षित ठिकाना) के रूप में देखा जा रहा है। MSCI India Index इस वर्ष अब तक सिर्फ 6% बढ़ा है, जबकि उभरते बाजारों में 30% और विकसित बाजारों में 17% की बढ़त दर्ज की गई है। बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, कोटक का कहना है कि भारत में शुद्ध AI कंपनियों की कमी के कारण यह बाजार वैश्विक AI अस्थिरता से अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकता है। भारत में अब भी वित्तीय, औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्रों की कंपनियां आय वृद्धि का मुख्य आधार बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, Nifty की आय FY26 में 10.7% और FY27 में 16.2% बढ़ने की संभावना है, जबकि वैल्यूएशन FY27 तक 19.9 गुना अग्रिम आय पर स्थिर होने की उम्मीद है।