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Mutual Funds में निवेश के समय बिल्कुल न करें ये गलतियां, रुक सकती है पोर्टफोलियो की ग्रोथ

म्यूचुअल फंड में सफल निवेश के लिए सिर्फ पैसा लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि सही रणनीति, अनुशासन और धैर्य भी जरूरी है। छोटी-छोटी गलतियों से बचकर और अपने वित्तीय लक्ष्यों पर फोकस रखकर ही आप बेहतर रिटर्न की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

कम से कम 5 साल या उससे अधिक के प्रदर्शन का विश्लेषण करें।- India TV Paisa Image Source : PEXELS कम से कम 5 साल या उससे अधिक के प्रदर्शन का विश्लेषण करें।

म्यूचुअल फंड को शेयर बाजार में निवेश का आसान और सुविधाजनक माध्यम माना जाता है। लेकिन अक्सर यही आसान विकल्प निवेशकों से बड़ी चूक करवा देता है। कई बार जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास और कई बार अधूरी जानकारी की वजह से पोर्टफोलियो उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ नहीं कर पाता। अगर आप भी सोच रहे हैं कि सब कुछ ठीक करने के बावजूद रिटर्न क्यों नहीं मिल रहा, तो संभव है कि आप अनजाने में कुछ सामान्य गलतियां दोहरा रहे हों। आइए, यहां इन्हें को समझते हैं। 

जोखिम क्षमता और लक्ष्य को नजरअंदाज करना

बिना स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य तय किए या अपनी जोखिम लेने की क्षमता समझे निवेश करना आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। मान लीजिए आप बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए फंड बना रहे हैं, तो यह लंबी अवधि का लक्ष्य है-ऐसे में धैर्य और निरंतर निवेश जरूरी है। वहीं अगर आपकी जोखिम लेने की क्षमता कम है, तो केवल हालिया ऊंचे रिटर्न देखकर स्मॉल कैप फंड चुनना नुकसानदेह हो सकता है।

क्या करें?
निवेश से पहले अपनी जोखिम प्रोफाइल का आकलन करें और लक्ष्य स्पष्ट करें।

दूसरों की नकल करना

किसी परिचित या सोशल मीडिया पर दिख रहे निवेशक को अच्छा रिटर्न मिलता देख उसी फंड में पैसा लगाना समझदारी नहीं है। हर व्यक्ति की आय, जिम्मेदारियां और जोखिम सहनशीलता अलग होती है।

क्या करें?
अपनी वित्तीय स्थिति और जरूरतों के अनुसार ही पोर्टफोलियो बनाएं।

हालिया रिटर्न से प्रभावित होना

अक्सर निवेशक पिछले एक साल के शानदार प्रदर्शन को देखकर फैसला लेते हैं। इसे ‘रेसेंसी बायस’ कहा जाता है। लेकिन बाजार का प्रदर्शन हर साल समान नहीं रहता।

क्या करें?
sbisecurities के मुताबिक, कम से कम 5 साल या उससे अधिक के प्रदर्शन का विश्लेषण करें। साथ ही फंड की रणनीति और जोखिम स्तर को भी समझें।

बाजार को टाइम करने की कोशिश

बाजार गिरने पर खरीदना और चढ़ने पर बेचना सुनने में सही लगता है, लेकिन इसे लगातार सफलतापूर्वक करना बेहद कठिन है। बाजार की चाल का सटीक अनुमान लगाना लगभग असंभव है।

क्या करें?
मार्केट टाइमिंग के बजाय ‘टाइम इन द मार्केट’ पर ध्यान दें। SIP के जरिए नियमित निवेश इस दिशा में मददगार हो सकता है।

घबराकर निवेश निकाल लेना

बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है। लेकिन कई निवेशक गिरावट देखकर घबरा जाते हैं और जल्दबाजी में निवेश निकाल लेते हैं, जिससे संभावित रिकवरी का फायदा नहीं मिल पाता।

क्या करें?
घबराने के बजाय अपने लक्ष्य और जोखिम प्रोफाइल की समीक्षा करें। अगर आपकी रणनीति सही है, तो निवेश जारी रखें।

जरूरत से ज्यादा फंड रखना

डाइवर्सिफिकेशन जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा फंड रखना भी नुकसानदेह हो सकता है। एक ही श्रेणी के कई फंड रखने से पोर्टफोलियो में समान शेयरों की पुनरावृत्ति हो जाती है, जिससे रिटर्न पर असर पड़ता है।

क्या करें?
कम लेकिन बेहतर फंड चुनें। गुणवत्ता पर ध्यान दें, संख्या पर नहीं।

पोर्टफोलियो की समीक्षा न करना

कई निवेशक मान लेते हैं कि एक बार निवेश करने के बाद कुछ करने की जरूरत नहीं। जबकि समय-समय पर समीक्षा करना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर पोर्टफोलियो को संतुलित किया जा सके।

क्या करें?
नियमित अंतराल पर अपने निवेश की समीक्षा करें और लक्ष्य के अनुसार री-बैलेंसिंग करें।

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