ETF और Mutual Fund में प्रमुख अंतर क्या है? निवेश से पहले समझें ये अहम बातें
Written By : Sourabha Suman Published : Nov 28, 2025 11:35 pm IST, Updated : Nov 28, 2025 11:35 pm IST
ETF निवेशकों को छोटी रकम से शुरुआत करने की सुविधा देते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड में आमतौर पर ज़्यादा मिनिमम इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होती है।

एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स या ETFs और म्यूचुअल फंड भारत में दो पॉपुलर निवेश साधन हैं, जिनकी मदद से निवेशक विविध प्रकार की सिक्योरिटीज के पोर्टफोलियो में निवेश कर सकते हैं। ETFs एक पैसिव निवेश फंड होते हैं, जो किसी विशेष इंडेक्स या एसेट को ट्रैक करते हैं। दूसरी तरफ, म्यूचुअल फंड सक्रिय रूप से मैनेज किए जाते हैं, जिनका लक्ष्य बाजार से बेहतर रिटर्न हासिल करना होता है। दोनों ही निवेश विकल्प निवेशकों को कम लागत में स्टॉक मार्केट में निवेश करने का अवसर प्रदान करते हैं। इन दोंनो में कुछ प्रमुख अंतर है।
एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड यानी ETF क्या है?
ETF पैसिव निवेश फंड होते हैं जो किसी विशिष्ट इंडेक्स या एसेट के प्रदर्शन को ट्रैक (कॉपी) करते हैं।
- ट्रेडिंग: ये सामान्य शेयरों की तरह ही स्टॉक एक्सचेंज (जैसे NSE और BSE) पर ट्रेड होते हैं।
- मूल्य निर्धारण: इन्हें पूरे ट्रेडिंग दिन में मार्केट घंटों के दौरान कभी भी खरीदा और बेचा जा सकता है। इनकी कीमतें बाजार के उतार-चढ़ाव के आधार पर लगातार बदलती रहती हैं।
- प्रकृति: ये अलग-अलग सेक्टर के इंडेक्स को कॉपी करते हैं और कई एसेट्स में एक्सपोजर देते हैं।
म्यूचुअल फंड क्या है?
Groww के मुताबिक, म्यूचुअल फंड कई निवेशकों से पैसा जमा करके स्टॉक, बॉन्ड और अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट का एक विविध पोर्टफोलियो बनाते हैं।
- प्रबंधन: इन फंड को एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के फंड मैनेजर द्वारा सक्रिय रूप से (Active) या निष्क्रिय रूप से (Passive) मैनेज किया जाता है।
- मूल्य निर्धारण: इन्हें दिन में केवल एक बार, बाजार बंद होने के बाद, फंड की नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर खरीदा या बेचा जाता है।
ETF और Mutual Fund में प्रमुख अंतर
- ETFs को किसी भी दूसरे स्टॉक की तरह स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड किया जाता है, जिससे वे ज़्यादा लिक्विड हो जाते हैं। लेकिन म्यूचुअल फंड को दिन के आखिर में NAV प्राइस पर ही खरीदा या बेचा जा सकता है।
- ETF में एक्सपेंस रेश्यो कम होता है लेकिन म्यूचुअल फंड में मैनेजमेंट फीस ज़्यादा होती है।
- ETF पैसिवली मैनेज होते हैं, जिसका मतलब है कि फंड एक खास इंडेक्स को दिखाता है, जिससे वे कम रिस्की और ट्रांसपेरेंट हो जाते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड एक्टिवली मैनेज होते हैं, जिसका मतलब है कि फंड मैनेजर अपने एनालिसिस और मार्केट आउटलुक के आधार पर सिक्योरिटीज़ में इन्वेस्ट करते हैं।
- ETF इन्वेस्टर्स को छोटी रकम से शुरुआत करने की सुविधा देते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड में आमतौर पर ज़्यादा मिनिमम इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होती है।
- ETF ज़्यादा टैक्स-एफ़िशिएंट होते हैं क्योंकि उन पर कैपिटल गेन टैक्स कम होता है, लेकिन म्यूचुअल फंड कम टैक्स-एफ़िशिएंट होते हैं।
- ETF ज़्यादा टारगेटेड इन्वेस्टमेंट देते हैं जो किसी खास इंडेक्स को दिखाते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड ज़्यादा डाइवर्सिफिकेशन ऑप्शन और सिक्योरिटीज़ की बड़ी रेंज में एक्सपोजर देते हैं।