प्रधानमंत्री वय वंदन योजना किसके लिए है? क्या मिलते हैं फायदे, जान लें पूरी बात
प्रधानमंत्री वय वंदन योजना में पॉलिसी के 3 साल पूरे होने के बाद लोन की सुविधा भी मिलती है। इस स्कीम को एकमुश्त परचेज प्राइस देकर खरीदा जा सकता है।

वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने और 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को अनिश्चित बाजार परिस्थितियों से बचाने के मकसद से केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY)’ नाम से एक खास योजना शुरू की है। यह योजना भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के जरिये संचालित होती है और सरकारी गारंटी के साथ वरिष्ठ नागरिकों को निश्चित पेंशन और सुरक्षित रिटर्न प्रदान करती है।
पात्रता की शर्तें
कम से कम एंट्री की उम्र 60 साल (पूरी हो चुकी है)
ज़्यादा से ज़्यादा एंट्री की उम्र की कोई लिमिट नहीं है
पॉलिसी टर्म 10 साल
कम से कम पेंशन
₹1,000/- हर महीने
₹3,000/- हर तिमाही
₹6,000/- हर छमाही
₹12,000/- हर साल
ज्यादा से ज्यादा पेंशन
₹5,000/- हर महीने
₹15,000/- हर तिमाही
₹30,000/- हर छमाही
₹60,000/- हर साल
परचेज प्राइस का पेमेंट
LIC की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, इस स्कीम को एकमुश्त परचेज प्राइस देकर खरीदा जा सकता है। पेंशनर के पास पेंशन की रकम या परचेज प्राइस में से कोई एक चुनने का ऑप्शन होता है। पेंशन के अलग-अलग तरीकों के तहत मिनिमम और मैक्सिमम परचेज़ प्राइस इस तरह हैं-
पेंशन का तरीका मिनिमम परचेज प्राइस मैक्सिमम परचेज प्राइस
सालाना ₹1,44,578/- ₹7,22,892/-
छमाही ₹1,47,601/- ₹7,38,007/-
तिमाही ₹1,49,068/- ₹7,45,342/-
मासिक ₹1,50,000/- ₹7,50,000/-
क्या मिलते हैं फायदे ?
10 साल के पॉलिसी टर्म के दौरान पेंशनर के जिंदा रहने पर, बकाया पेंशन (हर पीरियड के आखिर में चुने गए तरीके के हिसाब से) मिलेगी। 10 साल के पॉलिसी टर्म के दौरान पेंशनर की मौत होने पर, परचेज़ प्राइस बेनिफिशियरी को वापस कर दिया जाएगा। इसके अलावा, 10 साल के पॉलिसी टर्म के आखिर तक पेंशनर के जिंदा रहने पर, परचेज प्राइस के साथ आखिरी पेंशन इन्स्टॉलमेंट मिलेगी।
लोन की भी है सुविधा
पॉलिसी के 3 साल पूरे होने के बाद लोन की सुविधा मिलती है। ज़्यादा से ज़्यादा लोन जो दिया जा सकता है, वह परचेज़ प्राइस का 75% होगा। लोन अमाउंट पर लगने वाला इंटरेस्ट रेट समय-समय पर तय किया जाएगा। लोन का इंटरेस्ट पॉलिसी के तहत मिलने वाले पेंशन अमाउंट से वसूला जाएगा। लोन का इंटरेस्ट पॉलिसी के तहत पेंशन पेमेंट की फ्रीक्वेंसी के हिसाब से जुड़ेगा और यह पेंशन की ड्यू डेट पर देना होगा। हालांकि, लोन का बकाया हिस्सा एग्जिट के समय क्लेम की रकम से वसूला जाएगा।