गोल्ड ETF और सिल्वर ETF क्या हैं? निवेशकों के लिए कितना फायदेमंद? किसमें निवेश है ज्यादा सही?
अगर आप स्थिरता चाहते हैं तो गोल्ड ETF में निवेश कर सकते हैं। अगर आप हाई रिटर्न और रिस्क ले सकते हैं तो सिल्वर ETF में पैसा लगा सकते हैं। सलाह है कि कुल पोर्टफोलियो का 5–10% इनमें रखें, और SIP/लंपसम के जरिए निवेश करें।

गोल्ड ETF यानी Gold Exchange-Traded Fund) और सिल्वर ETF ऐसे एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड हैं जो निवेशकों को सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में बिना फिजिकल रूप में खरीदे निवेश करने का आसान, सुरक्षित और किफायती तरीका देते हैं। गोल्ड ETF मुख्य रूप से 99.5%+ शुद्ध गोल्ड बुलियन में निवेश करता है और सोने की बाजार कीमतों को ट्रैक करता है। सिल्वर ETF इसी तरह शुद्ध सिल्वर बुलियन में निवेश करता है और चांदी की कीमतों के साथ चलता है। ये ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) शेयर बाजार (एनएसई/बीएसई) पर सूचीबद्ध होते हैं, इसलिए इन्हें डीमैट अकाउंट के जरिए, बाजार के घंटों में शेयरों की तरह खरीदा-बेचा जा सकता है।
फिजिकल सोना-चांदी खरीदने की पुरानी समस्याएं
परंपरागत तरीके से सोना-चांदी (ज्वेलरी, सिक्के या बार) खरीदने में कई चुनौतियां हैं:
- शुद्धता की जांच मुश्किल और महंगी।
- स्टोरेज (लॉकर/घर में रखना) का खर्च और चोरी का खतरा।
- मेकिंग चार्जेस, GST और अन्य लागतें रिटर्न कम करती हैं।
- बड़ी मात्रा पर वेल्थ टैक्स लग सकता है।
गोल्ड और सिल्वर ETF के प्रमुख फायदे
ये ETF फिजिकल धातुओं की तुलना में कई मायनों में बेहतर हैं:
- सुरक्षा और सुविधा - धातु SEBI-रेगुलेटेड कस्टोडियन (जैसे बैंक) के पास सुरक्षित रखी जाती है। चोरी या नुकसान का कोई जोखिम नहीं।
- कम लागत - कोई मेकिंग चार्जेस नहीं। एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर 0.4–0.8% सालाना।
- हाई लिक्विडिटी - बाजार के घंटों में तुरंत खरीद-बिक्री संभव, फिजिकल की तरह बेचने में झंझट नहीं।
- पारदर्शिता - रीयल-टाइम NAV और कीमतें उपलब्ध, ट्रैकिंग आसान।
- टैक्स बेनिफिट - फाइनेंशियल एसेट होने से वेल्थ टैक्स नहीं लगता। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (>1 साल) पर 12.5% टैक्स (2026 नियमों के अनुसार)।
- छोटे निवेश से शुरुआत - ₹500–1000 से भी निवेश संभव, SIP जैसा भी कर सकते हैं (कुछ प्लेटफॉर्म्स पर)।
पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन का मजबूत टूल
- सोना और चांदी का शेयर बाजार, बॉन्ड्स से कम कोरिलेशन होता है।
- आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई या बाजार क्रैश में सेफ-हेवन की भूमिका निभाते हैं।
- 2026 में गोल्ड ETF औसतन 15–16%+ रिटर्न दे रहे हैं, जबकि सिल्वर ETF में 35–40%+ तक रिटर्न (उच्च वोलेटिलिटी के साथ) देखा गया है।
- एक्सपर्ट्स 8–10% पोर्टफोलियो में कमोडिटी (मुख्य रूप से गोल्ड, सिल्वर सेकेंडरी) की सलाह देते हैं।
कौन है बेहतर?
गोल्ड और सिल्वर ETF रिटेल निवेशकों के लिए आज का सबसे स्मार्ट, सुरक्षित और कुशल तरीका हैं। खासकर 2026 में जब कीमती धातुओं में वैश्विक अनिश्चितताओं (जियोपॉलिटिकल टेंशन, इंटरेस्ट रेट्स) के कारण मजबूत मांग बनी हुई है। ये ETF लिक्विडिटी, कम लागत, डाइवर्सिफिकेशन और सेफ-हेवन प्रॉपर्टी देते हैं, जो फिजिकल गोल्ड/सिल्वर में नहीं मिलती। हालांकि, बाजार रिस्क हमेशा रहता है-कीमतें उतार-चढ़ाव दिखाती हैं। इसलिए, निवेश से पहले अपनी रिस्क टॉलरेंस, लक्ष्य और समय अवधि का आकलन जरूर करें। लॉन्ग-टर्म (5+ साल) में ये ETF अक्सर बेहतर परफॉर्म करते हैं।