सरहदों पर बढ़ती चुनौतियों और आधुनिक भारत के बढ़ते संकल्प के बीच, केंद्र सरकार ने रक्षा बजट की तिजोरी खोल दी है। वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किए गए बजट 2026 में भारतीय सेनाओं के लिए एक ऐसा रक्षा कवच तैयार किया गया है, जिसकी धमक न सिर्फ देश के भीतर बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। इस साल का रक्षा आवंटन केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के उन 'अभेद्य' इरादों की कहानी है, जो राफेल की दहाड़ और स्वदेशी मिसाइलों की ताकत से लिखी जा रही है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने रक्षा मंत्रालय को ₹7.8 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट ऐलान किया है। यदि हम इसकी तुलना पिछले साल से करें, तो यह एक बड़ी छलांग है। पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में सरकार ने रक्षा क्षेत्र को ₹6,81,210.27 करोड़ दिए थे, जो खुद 2024-25 के मुकाबले 9.5% अधिक था। इस साल का बजट दर्शाता है कि भारत अपनी सामरिक शक्ति को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।
आधुनिकीकरण पर जोर
आधुनिक युद्ध अब केवल संख्या बल पर नहीं, बल्कि तकनीक और एडवांस वेपन्स पर लड़े जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आधुनिकीकरण के लिए ₹2.19 लाख करोड़ की राशि अलग रखी है। यह फंड नई तकनीकों, सर्विलांस सिस्टम और भविष्य के हथियारों की खरीद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
पाइपलाइन में मेगा प्रोजेक्ट्स: राफेल से लेकर सबमरीन तक
रक्षा मंत्रालय इस साल कई बड़े रक्षा सौदों को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर खर्च होगा:
- राफेल फाइटर जेट्स: वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए नए अनुबंध।
- सबमरीन (पनडुब्बी): नौसेना के लिए अत्याधुनिक सबमरीन प्रोजेक्ट्स, जो हिंद महासागर में भारत की पकड़ मजबूत करेंगे।
- अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAVs): सीमा पर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक और घातक ड्रोन की खरीद।
2025 के मुकाबले बढ़ोतरी का आंकड़ा
2025-26 के बजट की तुलना करें तो इस साल रक्षा बजट में लगभग 1.18 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी न सिर्फ वर्तमान सैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य के प्रोजेक्ट्स और रणनीतिक सुधारों को भी गति देगी।
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