Budget 2026: रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए सरकार ने किए बड़े ऐलान, जानें चीन को कैसे मिलेगी कड़ी टक्कर
Budget 2026: बजट 2026 में सरकार ने रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए डेडिकेटेड कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर सेक्टर की दिशा में और कदम उठाने का ऐलान किया है। इसके तहत ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में खनन, प्रोसेसिंग व मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर आयात निर्भरता घटाने और चीन के दबदबे को चुनौती देने का लक्ष्य रखा गया है।

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपना रिकॉर्ड 9वां बजट पेश किया। इस बजट में कई बड़े ऐलान किए गए हैं, जिनमें रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए विशेष कॉरिडोर बनाने और सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत करने की योजनाएं शामिल हैं। ये कदम भारत की मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक गाड़ियों, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा जरूरतों को मजबूती से पूरा करने के लिए उठाए जा रहे हैं। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है और उन राज्यों को विशेष मदद देगी जहां ये मिनरल्स पाए जाते हैं।
रेडेडिकेटेड कॉरिडोर में शामिल होंगे ये राज्य
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बताया कि सरकार रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि साल 2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के लिए एक योजना शुरू की गई थी। अब, 2025-2026 के दौरान सरकार उन राज्यों को पूरा समर्थन देगी जहां ये खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। खासतौर पर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इस स्कीम का मुख्य मकसद भारत के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करना है और जरूरी मिनरल्स के आयात पर निर्भरता को कम करना है।
रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर हुए ये बड़े ऐलान
रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए सरकार ने निम्नलिखित प्रमुख ऐलान किए हैं:
- रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए देश में डेडिकेटेड स्पेशल कॉरिडोर बनाए जाएंगे।
- ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ये रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
- जिन राज्यों में रेयर अर्थ मिनरल्स प्रचुर मात्रा में हैं, उन्हें केंद्र सरकार की विशेष सहायता मिलेगी।
- नवंबर 2025 में लॉन्च की गई रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स स्कीम को 2025-26 में तेजी से लागू किया जाएगा।
- रेयर अर्थ मिनरल्स की माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
- रेयर अर्थ मिनरल्स के आयात पर निर्भरता कम करने पर फोकस रहेगा।
- सेमीकंडक्टर, ईवी, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को सुरक्षित किया जाएगा।
नवंबर 2025 में सरकार ने लॉन्च की थी स्कीम
बता दें कि नवंबर 2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के लिए यह स्कीम लॉन्च की गई थी। अब इसके तहत रेयर अर्थ मिनरल्स की खनन यानी कि माइनिंग, प्रसंस्करण यानी कि प्रोसेसिंग, अनुसंधान यानी कि रिसर्च और निर्माण यानी कि मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भारत दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा, खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां ये मिनरल्स बहुत जरूरी हैं। वित्त मंत्री ने साफ कहा कि इन कदमों से भारत की मैन्युफैक्चरिंग, ईवी, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा जरूरतों को सुरक्षित किया जा सकेगा। दुनिया में चीन के पास रेयर अर्थ मिनरल्स का सबसे बड़ा भंडार है, जिसकी वजह से वह इस क्षेत्र में दबदबा बनाए हुए है। भारत के ये नए कदम चीन की इस दादागिरी को खत्म करने में मदद करेंगे।
आखिर ये रेयर अर्थ मिनरल्स होते क्या हैं?
रेयर अर्थ मिनरल्स या रेयर अर्थ मेटल्स 17 रासायनिक तत्वों का एक समूह हैं। इनमें आवर्त सारणी या पीरियोडिक टेबल के 15 लैंथेनाइड्स तत्व शामिल हैं, साथ ही स्कैंडियम और इट्रियम भी इसमें हैं। इनके नाम में भले ही 'रेयर' या दुर्लभ शब्द है, लेकिन ये धरती की परत में काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें दुर्लभ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन्हें शुद्ध रूप में निकालना और अलग करना बहुत मुश्किल काम है। यह तकनीकी रूप से जटिल और महंगा होता है। ये मिनरल्स आधुनिक तकनीक के लिए बहुत जरूरी हैं। उदाहरण के लिए, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी, सौर पैनल और रक्षा उपकरणों में इनका इस्तेमाल होता है। बिना इनके, कई हाई-टेक चीजें बनाना मुश्किल हो जाता है। भारत में इनकी उपलब्धता बढ़ाने से हम विदेशी आयात पर कम निर्भर होंगे और अपनी जरूरतें खुद पूरी कर सकेंगे।