घर खरीदने का सपना देख रहे लाखों लोगों के लिए बजट 2026 बड़ी राहत लेकर आ सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार केंद्रीय बजट में सरकार आर्थिक विकास को रफ्तार देने के साथ-साथ आवास क्षेत्र पर खास ध्यान देगी। खासतौर पर किफायती आवास की परिभाषा में बड़ा बदलाव संभव है, जिससे महानगरों में घर खरीदना आसान हो सकता है। लंबे समय से रियल एस्टेट सेक्टर और होम बायर्स किफायती आवास की कीमत सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जिस पर सरकार बजट के जरिए फैसला ले सकती है।
वर्तमान नियमों के अनुसार देश में 45 लाख रुपये तक की कीमत वाले घर और फ्लैट को किफायती आवास की श्रेणी में रखा गया है। इसके तहत मेट्रो शहरों में अधिकतम 60 वर्ग मीटर और गैर-मेट्रो शहरों में 90 वर्ग मीटर तक के मकानों को ही इस श्रेणी में शामिल किया जाता है। हालांकि बीते कुछ वर्षों में जमीन, निर्माण सामग्री और मजदूरी की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह सीमा अब अव्यावहारिक मानी जा रही है।
महंगे हुए शहरों के घर
रियल एस्टेट उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने वर्ष 2017 में जब 45 लाख रुपये की सीमा तय की थी, तब बाजार की परिस्थितियां अलग थीं। आज हालात यह हैं कि बड़े शहरों में दो कमरों का सामान्य फ्लैट भी 70 लाख रुपये से कम में मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में पहली बार घर खरीदने वाले लोग किफायती आवास की श्रेणी से बाहर हो जाते हैं और उन्हें टैक्स छूट व सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
खरीदारों को संभावित राहत
डेवलपर्स और खरीदारों की ओर से सरकार से मांग की जा रही है कि किफायती आवास की अधिकतम कीमत सीमा को बढ़ाकर 70 से 90 लाख रुपये किया जाए। यदि बजट 2026 में यह बदलाव होता है, तो न केवल मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि हाउसिंग सेक्टर को भी नई गति मिलेगी। इससे मांग बढ़ने की उम्मीद है, जो निर्माण गतिविधियों और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा दे सकती है।
एक्सपर्ट का क्या मानना?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार किफायती आवास की नई सीमा तय करती है, तो इसका सीधा फायदा उन लोगों को होगा जो पहली बार घर खरीदने की योजना बना रहे हैं। टैक्स छूट और सब्सिडी योजनाओं के दायरे में आने से उनकी ईएमआई का बोझ कम होगा और घर खरीदने का सपना हकीकत में बदल सकता है। अब सबकी निगाहें बजट 2026 पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि आने वाले समय में घर खरीदना कितना आसान होता है।
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