भारत में त्योहारी सीजन न सिर्फ खरीदारी का उत्सव लेकर आया बल्कि नौकरियों की झड़ी भी लगा गया। इस बार देश में गिग और टेंपररी नौकरियों की मांग में पिछले साल की तुलना में 25% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने दिवाली से पहले ऑर्डर्स की बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए हायरिंग की रफ्तार तेज कर दी।
रिकॉर्ड बना 2025 का फेस्टिव सीजन
स्टाफिंग फर्म्स के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 का फेस्टिव क्वार्टर अब तक का सबसे बिजी सीजन साबित हुआ। कंपनियों ने इस बार न सिर्फ पहले से प्लानिंग की, बल्कि बड़े लेवल पर हायरिंग भी की ताकि बढ़ती खपत का सामना किया जा सके। टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमण्यम ए ने बताया कि इस सीजन में गिग हायरिंग खासकर ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और डिलीवरी सेक्टर में 20-25% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
डिलीवरी और वेयरहाउस में सबसे ज्यादा मांग
एनएलबी सर्विसेज के मुताबिक, इस साल की सबसे बड़ी उछाल वेयरहाउस और लास्ट-माइल डिलीवरी रोल्स में रही, जिन्होंने कुल नई भर्तियों का करीब 60-65% हिस्सा संभाला। क्विक-कॉमर्स कंपनियों ने रिकॉर्ड ऑर्डर वॉल्यूम को संभालने के लिए अपने डार्क स्टोर और राइडर नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया।
टियर-2 शहर बने नए रोजगार हब
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में भले ही कुल हायरिंग सबसे ज्यादा रही हो, लेकिन टियर-2 शहरों में वृद्धि की रफ्तार कहीं ज्यादा रही। एडेको इंडिया के अनुसार, गैर-मेट्रो शहरों में हायरिंग डिमांड 21-25% बढ़ी है, जबकि मेट्रो में यह वृद्धि 14% के आसपास रही। लखनऊ, जयपुर, नागपुर, कोयंबटूर और भुवनेश्वर जैसे शहर नए लेबर हब बनकर उभरे हैं।
दोगुने इंसेंटिव्स और बोनस का दौर
कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए कंपनियों ने सर्ज इंसेंटिव, बोनस और रेफरल रिवॉर्ड्स जैसे ऑफर्स दिए। एनएलबी सर्विसेज के मुताबिक, कुछ रोल्स में इंसेंटिव्स सामान्य से दोगुने तक पहुंच गए। वहीं एडेको इंडिया ने बताया कि एंट्री-लेवल स्टाफ की सैलरी में 12-15% और एक्सपीरियंस्ड वर्कर्स के लिए 18-22% की बढ़ोतरी की गई।
दीवाली के बाद भी जारी रहेगा हायरिंग ट्रेंड
टीमलीज के मुताबिक, इस फेस्टिव सीजन में रखे गए करीब 25-30% कर्मचारियों को कंपनियां स्थायी तौर पर बनाए रखने की तैयारी में हैं। एनएलबी सर्विसेज के अनुसार, अब गिग रोल्स को सिर्फ सीजनल जरूरत नहीं बल्कि लॉन्ग-टर्म वर्कफोर्स स्ट्रेटेजी के रूप में देखा जा रहा है।
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