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Economic Survey 2026: महंगाई कंट्रोल से लेकर रुपये की चाल तक, जानें इकोनॉमिक सर्वे की 5 बड़ी बातें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में रखे गए इस दस्तावेज में साफ किया गया है कि भारत अब केवल ‘स्वदेशी’ सोच तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था को एक रणनीतिक अनिवार्यता के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आइए जानें इकोनॉमिक सर्वे 2026 की 5 बड़ी बातें।

इकोनॉमिक सर्वे की 5...- India TV Paisa Image Source : CANVA इकोनॉमिक सर्वे की 5 बड़ी बातें

Economic Survey 2026: यूनियन बजट से ठीक पहले देश की आर्थिक सेहत का रोडमैप माने जाने वाला इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 आज संसद में पेश कर दिया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में रखे गए इस डॉक्यूमेंट ने साफ कर दिया है कि भारत अब केवल स्वदेशी सोच तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक हालात में अर्थव्यवस्था को एक रणनीतिक अनिवार्यता के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। महंगाई, राजकोषीय घाटा, रुपये की चाल से लेकर कृषि उत्पादन तक इकोनॉमिक सर्वे ने कई अहम संकेत दिए हैं, जो आने वाले बजट और नीति फैसलों की दिशा तय कर सकते हैं।

1. राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का फोकस

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, सरकार ने राजकोषीय घाटे को काबू में रखने में सफलता हासिल की है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.8 प्रतिशत रहा, जो बजट अनुमान 4.9 प्रतिशत से बेहतर है। वहीं, FY26 में इसे घटाकर 4.4 प्रतिशत तक लाने का टारगेट तय किया गया है। यह संकेत देता है कि सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।

2. महंगाई पर बड़ी राहत

महंगाई के मोर्चे पर सर्वे ने राहत की खबर दी है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान हेडलाइन CPI महंगाई घटकर 1.7 प्रतिशत पर आ गई। सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट इसका प्रमुख कारण रही। कोर महंगाई भी कंट्रोल में बताई गई है, हालांकि कीमती धातुओं की कीमतों का हल्का असर अब भी बना हुआ है।

3. 2026 के लिए तीन ग्लोबल सिनेरियो

इकोनॉमिक सर्वे ने आने वाले समय के लिए तीन संभावित ग्लोबल हालात पेश किए हैं- कहीं हालात नियंत्रित रहते हुए भी अस्थिरता बनी रह सकती है, कहीं बड़े देशों के बीच टकराव से वैश्विक व्यवस्था बिखर सकती है और कहीं लगातार एक के बाद एक बड़े आर्थिक झटके लग सकते हैं। ऐसे में सर्वे का कहना है कि भारत को इन अनिश्चित हालात से सुरक्षित रहने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होगा, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर देश पर कम पड़े।

4. रुपये की चाल पर चिंता

सर्वे में माना गया है कि 2025 में भारतीय रुपया उम्मीद से कमजोर रहा और अपनी क्षमता से नीचे कारोबार करता दिखा। हालांकि, कमजोर रुपया अमेरिकी टैरिफ जैसे बाहरी दबावों के असर को कुछ हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

5. कृषि क्षेत्र से मिले सकारात्मक संकेत

कृषि क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2024-25 में अनाज उत्पादन रिकॉर्ड 3,320 लाख टन तक पहुंच गया। रबी की बुवाई में 3.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय के लिहाज से अच्छे संकेत है।

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