भारतीय रियल एस्टेट बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां कुछ साल पहले तक किफायती और छोटे घरों की मांग सबसे ज्यादा थी, वहीं अब होमबायर्स की प्रायोरिटी पूरी तरह बदलती नजर आ रही हैं। ताजा ICC-ANAROCK रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 3BHK और उससे बड़े घर अब खरीदारों की पहली पसंद बन चुके हैं और कुल मांग में इनकी हिस्सेदारी करीब 45 से 50 फीसदी तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा 2018 में महज 30 फीसदी के आसपास था, जो इस बदलाव की गहराई को साफ दर्शाता है।
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित रियल एस्टेट समिट 2026 में जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े घरों की ओर झुकाव कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि एक स्थायी और स्ट्रक्चरल बदलाव है। वर्क फ्रॉम होम, मल्टी-जेनरेशन लिविंग, बेहतर लाइफस्टाइल और हेल्थ व वेलनेस पर बढ़ते फोकस ने लोगों को ज्यादा स्पेस वाले घर चुनने के लिए प्रेरित किया है। अब घर सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि काम, आराम और निजी जीवन का केंद्र बन चुका है।
कीमतों में उछाल
इस बदले ट्रेंड का असर बिक्री के आंकड़ों में भी दिख रहा है। 2025 में देश के टॉप सात शहरों में घरों की कुल बिक्री भले ही सालाना आधार पर 14 फीसदी घटकर करीब 3.96 लाख यूनिट रह गई हो, लेकिन ट्रांजैक्शन वैल्यू 6 फीसदी बढ़कर 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई। यानी कम यूनिट्स बिकने के बावजूद ज्यादा कीमत वाले घरों की वजह से बाजार की कुल वैल्यू बढ़ी है।
लग्जरी की बढ़त
रिपोर्ट के अनुसार, लग्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट में भी जबरदस्त उछाल आया है। 75 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी, जो 2021 में लगभग 60 फीसदी थी, अब घटकर करीब 32 फीसदी रह गई है। वहीं, 4 करोड़ रुपये से ऊपर के घर अब कुल बिक्री में 18–20 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। खासतौर पर मुंबई महानगर क्षेत्र में अल्ट्रा-लग्जरी घरों की मांग तेजी से बढ़ी है।
डेवलपर्स की स्ट्रैटेजी
डेवलपर्स भी इस बदलाव के अनुरूप अपनी स्ट्रैटेजीबदल रहे हैं। अब लो-डेंसिटी, ज्यादा सुविधाओं वाले और बड़े यूनिट साइज के प्रोजेक्ट्स पर फोकस बढ़ रहा है। मजबूत ब्रांड, समय पर डिलीवरी और भरोसेमंद डेवलपर्स को खरीदार ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
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