भारतीय रेलवे देश की इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की धुरी बनकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि यह आर्थिक विकास, औद्योगिक सप्लाई चेन और ऊर्जा लॉजिस्टिक्स का भी आधार बन चुका है। रेलवे ने बुनियादी ढांचे के विकास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ताजा इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, मार्च 2025 तक भारत का रेलवे नेटवर्क 69,439 किलोमीटर तक फैल चुका है और वित्त वर्ष 2026 में इसे 3500 किलोमीटर और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यह विस्तार न केवल कनेक्टिविटी बढ़ा रहा है, बल्कि देश की आर्थिक रफ्तार को भी नई ऊर्जा दे रहा है।
इलेक्ट्रिफिकेशन में रचा इतिहास
रेलवे की सबसे बड़ी उपलब्धि इसके विद्युतीकरण अभियान में दिखी है। अक्टूबर 2025 तक, देश के कुल रेल नेटवर्क का 99.1 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिफाइड किया जा चुका है। इसका सीधा मतलब है कि अब लगभग पूरा रेल नेटवर्क डीजल मुक्त होने के करीब है, जिससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि रेलवे के ईंधन खर्च में भी भारी बचत होगी।
नेटवर्क विस्तार की दोगुनी रफ्तार
2014 के बाद से रेलवे नेटवर्क के विस्तार की गति में जबरदस्त उछाल आया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2004-14 के दशक (औसत 1499 किमी प्रति वर्ष) की तुलना में 2014-24 के दौरान रेल लाइनों के चालू होने की दर दोगुनी से भी ज्यादा (औसत 3118 किमी प्रति वर्ष) हो गई है।
Image Source : Ministry of Railwaysरेलवे नेटवर्क का विस्तार
वित्त वर्ष 2026 (FY26) का मेगा प्लान
रेलवे यहीं रुकने वाला नहीं है। वित्त वर्ष 2026 के लिए सरकार ने 3,500 किलोमीटर नई लाइनें जोड़ने का महत्वाकांक्षी टारगेट रखा है। इसके लिए बजट में ऐतिहासिक रूप से हाई कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। वित्त वर्ष 2026 (BE) के लिए यह परिव्यय 2.65 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।
आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षा
भारी निवेश का बड़ा हिस्सा नई लाइनों, रेल पटरियों के दोहरीकरण, सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने और सुरक्षा संबंधी कामों पर खर्च किया जा रहा है। रेलवे अब माल ढुलाई के लिए भी रीढ़ की हड्डी बन गई है, जो कोयला, औद्योगिक रसद और कंटेनर ट्रैफिक को 'डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर' के जरिए तेजी से पहुंचा रही है। स्टेशनों के पुनर्विकास और डिजिटल सिस्टम के आने से यात्रियों का अनुभव भी अब पहले से कहीं बेहतर और सुरक्षित होने जा रहा है।
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