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रूस की मार्केट में भारत की एंट्री होगी और मजबूत? 65 नॉन-टैरिफ रुकावटें हटवाने पर सरकार का फोकस

रूस के साथ बढ़ते आर्थिक रिश्तों के बीच भारत एक बड़े व्यापारिक बदलाव की तैयारी में है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा से पहले सरकार तेज़ी से कोशिशों में जुट गई है कि रूस और उसके नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के विशाल बाज़ार में भारत की एंट्री आसान हो।

पुतिन की भारत यात्रा...- India TV Hindi
Image Source : CANVA पुतिन की भारत यात्रा से पहले बड़ी हलचल!

रूस के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक जियो–इकॉनॉमिक बदलावों के बीच भारत एक नई रणनीतिक चाल चल रहा है। रूस की मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए भारत अब सिर्फ तेल और फर्टिलाइजर आयात तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि फार्मा से लेकर इंजीनियरिंग और कृषि तक कई सेक्टर्स में बड़ा एक्सपोर्ट पुश देने की तैयारी है। ईएईयू (Eurasian Economic Union) के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के जरिए भारत अपनी भूमिका आयातकर्ता से बड़ा निर्यात पार्टनर की ओर मोड़ना चाहता है।

सरकार का यह तेज़ कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा अब 59 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यानी हम रूस से बहुत ज्यादा खरीद रहे हैं, लेकिन बेच कम पा रहे हैं। यही वजह है कि सरकार की पहली कोशिश है कि रूस भारतीय सामानों पर लगे अलग-अलग नियम और रुकावटें कम करे, ताकि हमारे उत्पाद वहां आसानी से बिक सकें।

भारत ने रूस को समुद्री उत्पादों पर लगी 65 से ज्यादा नॉन-टैरिफ रुकावटों की पूरी लिस्ट दे दी है। फार्मा सेक्टर में भी चार बड़ी दिक्कतें हैं, जो दवाओं का रजिस्ट्रेशन बहुत मुश्किल, क्लिनिकल ट्रायल की सख्ती, सीमित बाजार में प्रवेश, और दवाओं की कीमत तय करने के कठिन नियम हैं। ये सभी नियम भारत जैसे बड़े दवा निर्यातक देश के लिए बड़ी समस्या बन रहे हैं और एक्सपोर्ट बढ़ाने में रुकावट पैदा करते हैं।

रूस बाजार में अवसर

ईएईयू की बाजार भारतीय निर्यातकों, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME), के लिए कई नए मौके ला सकती है। लेकिन अभी हालात यह हैं कि रूस जितना सामान बाहर से खरीदता है, उसमें भारत का हिस्सा सिर्फ 2.3% है यानी बहुत कम। इस नए समझौते में भारत ऐसे उत्पादों का निर्यात बढ़ाना चाहता है, जैसे- दवाइयां, केमिकल, इंजीनियरिंग सामान, मशीनरी, गाड़ियां, कृषि से जुड़े प्रोडक्ट और सी फूड। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि इस व्यापार समझौते में सोना और कीमती धातुएं शामिल नहीं की जाएंगी। वजह यह है कि यूएई के साथ समझौता होने के बाद भारत में सोना-चांदी की आयात काफी बढ़ गई थी, जिससे चिंता बढ़ी थी।

एफटीए वार्ताओं के मुद्दे

ईएईयू के साथ चल रही एफटीए वार्ताओं में टैरिफ, कस्टम्स प्रशासन, सैनिटरी–फाइटोसैनिटरी नियम, तकनीकी मानक, प्रतिस्पर्धा और ई–कॉमर्स जैसे अहम मुद्दे शामिल होंगे। सरकार ने उद्योग जगत से रूस तक माल पहुंचाने में लगने वाली शिपिंग दिक्कतों, कस्टम्स डॉक्यूमेंटेशन और बैंकिंग से जुड़ी चुनौतियों पर भी विस्तृत फीडबैक मांगा है। साथ ही, चूंकि ईएईयू समझौते में सेवा क्षेत्र शामिल नहीं होता, इसलिए भारत रूस के साथ एक अलग सर्विसेज एग्रीमेंट पर भी विचार कर रहा है। इसके अलावा, क्योंकि ईएईयू के साथ होने वाले समझौतों में सेवा क्षेत्र शामिल नहीं होता, इसलिए भारत रूस के साथ अलग से एक सर्विस सेक्टर समझौता करने पर भी विचार कर रहा है।

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