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Hindi News पैसा बिज़नेस अब न चाहकर भी आपको ट्रेन में लेना पड़ेगा खाना? IRCTC ने चुपचाप किया बड़ा बदलाव

अब न चाहकर भी आपको ट्रेन में लेना पड़ेगा खाना? IRCTC ने चुपचाप किया बड़ा बदलाव

वंदे भारत या शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। IRCTC ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रक्रिया में चुपचाप ऐसा बदलाव कर दिया है, जिससे यात्रियों को अपनी मर्ज़ी से “नो फूड ऑप्शन” चुनने की सुविधा लगभग खत्म होती दिख रही है।

ट्रेन का खाना- India TV Paisa Image Source : OFFICIAL WEBSITE ट्रेन का खाना

वंदे भारत, शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वालों के लिए एक नई दिक्कत सामने आई है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने चुपचाप इन ट्रेनों की टिकट बुकिंग प्रक्रिया में बड़ा बदलाव कर दिया है, जिससे “नो फूड ऑप्शन” यानी बिना खाना लिए टिकट बुक करने का ऑप्शन हटा दिया गया है। इस फैसले ने यात्रियों को हैरान कर दिया है, क्योंकि अब उन्हें न चाहते हुए भी खाने के लिए 300 से 400 रुपये तक एक्स्ट्रा खर्च करना पड़ रहा है।

पहले ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान यात्री अपनी सुविधा के अनुसार “नो मील” या “नो फूड” का ऑप्शन चुन सकते थे। इससे खासतौर पर छोटे सफर करने वालों को राहत मिलती थी, जो ट्रेन में भोजन नहीं लेना चाहते थे। लेकिन अब आईआरसीटीसी की वेबसाइट और ऐप पर यह सुविधा नहीं दिख रही और यात्रियों को मजबूरन मील टाइप (वेज, नॉन-वेज, जैन या डायबिटिक मील) चुननी पड़ रही है।

Image Source : IRCTCआईआरसीटीसी से No food का ऑप्शन गायब!

यात्रियों में नाराजगी

यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी भी जताई है। कई लोगों ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा कि यह बदलाव चुपचाप किया गया और टिकट बुक करते समय उन्हें बिना जानकारी के ही एक्स्ट्रा पैसे चुकाने पड़े। एक यूजर ने लिखा, “मैं सिर्फ तीन घंटे के सफर पर था, लेकिन सिस्टम ने अपने आप मील जोड़ दिया- बिना पूछे ही!”

रेलवे अधिकारियों क्या कहना?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे अधिकारियों ने दावा किया है कि “नो फूड” ऑप्शन पूरी तरह हटाया नहीं गया है, बल्कि उसकी जगह में थोड़ा बदलाव किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यात्रियों के लिए ऑप्टृ-आउट करने का ऑप्शन अभी भी उसी पेज पर मौजूद है, बस थोड़ा ध्यान से देखने की जरूरत है। फिर भी, यात्रियों में भ्रम और असंतोष बना हुआ है, क्योंकि अधिकतर लोगों को यह ऑप्शन दिख नहीं रहा। एक्सपर्ट का कहना है कि रेलवे को अपने पोर्टल और ऐप में पारदर्शिता लानी चाहिए, ताकि यात्रियों को किसी भी सेवा के लिए मजबूर न किया जाए।

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