मुंबई में 9.239 किलोमीटर लंबे ओरेन्ज गेट-मरीन ड्राइव टनल प्रोजेक्ट की टनलिंग प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश का पहला इतना बड़ा अर्बन रोड टनल बनने जा रहा है, जो जमीन से 50 मीटर नीचे समुद्री चट्टानों, रेल कॉरिडोर और मेट्रो लाइन के बीच से होकर गुजरेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को इंजीनियरिंग का कमाल बताते हुए भारत की सबसे बड़ी स्लरी-शील्ड टनल बोरिंग मशीन (TBM) को फ्लैग ऑफ किया। यह मशीन विशेष रूप से मुंबई के कठोर तटीय भूगर्भ को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। फडणवीस ने कहा कि यह टनल मुंबई के ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल देगी और शहर की स्पीड को अगले लेवल पर ले जाएगी।
आपको बता दें कि टनल का रूट ब्रिटिश युग की हेरिटेज बिल्डिंग्स, सेंट्रल रेलवे और वेस्टर्न रेलवे कॉरिडोर और यहां तक कि मेट्रो लाइन-3 से 50 मीटर नीचे से होकर गुजरेगा। इसके बावजूद प्रोजेक्ट का डिजाइन और सुरक्षा स्टैंडर्ड काफी एडवांस रखे गए हैं। यह टनल भविष्य में नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
प्रोजेक्ट की लागत 8056 करोड़
लगभग 8056 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह मेगा प्रोजेक्ट 54 महीनों में पूरा करने का टारगेट है। अब तक करीब 14% काम पूरा हो चुका है। सरकार को उम्मीद है कि निर्माण काम दिसंबर 2028 से छह महीने पहले ही पूरा हो जाएगा।
घंटों का रास्ता 5 मिनट में पूरा होगा
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ओरेन्ज गेट से मरीन ड्राइव तक की यात्रा सिर्फ 5 मिनट में संभव होगी, जो आज ट्रैफिक के कारण सबसे धीमी और जाम से भरी रूटों में से एक है। हर टनल में दो नियमित लेन और एक इमरजेंसी लेन होगी, जिसमें 80 किमी/घंटा की डिजाइन स्पीड से वाहन चल पाएंगे। सुरक्षा के लिए हर 300 मीटर पर क्रॉस-पैसेज, अत्याधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, एडवांस फायर सप्रेशन टेक्नोलॉजी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम (ITS) लगाया जाएगा। टनल से जुड़ने के लिए कट-एंड-कवर स्ट्रक्चर, खुले रैंप और एक स्पेशल एलीवेटेड डाउन रैंप भी बनाया जा रहा है, जो सीधे ईस्टर्न फ्रीवे से जुड़ जाएगा।
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