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Hindi News पैसा बिज़नेस लोगों को पता ही नहीं कहां लगा रहे पैसा...! 80 ट्रिलियन का म्यूचुअल फंड मार्केट देखकर SEBI प्रमुख ने कही कड़वी सच्चाई

लोगों को पता ही नहीं कहां लगा रहे पैसा...! 80 ट्रिलियन का म्यूचुअल फंड मार्केट देखकर SEBI प्रमुख ने कही कड़वी सच्चाई

डिजिटल दौर में हर दिन लाखों लोग बाजार में कदम रख रहे हैं, म्यूचुअल फंड के एसेट्स 80 ट्रिलियन के पार पहुंच गए हैं और डिमैट अकाउंट की संख्या नए रिकॉर्ड बना रही है। लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक सच्चाई है जो डराती भी है और चौंकाती भी।

SEBI चीफ का बड़ा बयान- India TV Paisa Image Source : PROFILE PHOTO SEBI चीफ का बड़ा बयान

भारत का म्यूचुअल फंड मार्केट रिकॉर्ड तोड़ गति से बढ़ रहा है। लेकिन इस चमकदार आंकड़े के पीछे एक ऐसी कड़वी हकीकत छिपी है, जिसने SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे को भी चिंता में डाल दिया है। उन्होंने साफ कहा कि लोग निवेश तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह समझ ही नहीं कि उनका पैसा कहां और कैसे लग रहा है। एक तेजी से डिजिटल होती दुनिया में यह अनजानगी बड़ा खतरा बनती जा रही है।

पुदुचेरी में NSE द्वारा आयोजित रीजनल इन्वेस्टर अवेयरनेस सेमिनार में तुहिन कांत पांडे ने कहा कि वित्तीय साक्षरता आज सिर्फ एक ऑप्शन नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में लोगों के वित्तीय फैसले पहले से कहीं ज्यादा गहराई से जुड़े हैं, इसलिए जानकारी के बिना निवेश निवेश नहीं, बल्कि जोखिम है।

तुहिन कांत पांडे ने बताया कि पुदुचेरी जैसे छोटे केंद्र में भी मार्केट पार्टिसिपेशन तेजी से बढ़ा है। FY15 में जहां सिर्फ 22,000 निवेशक थे, वहीं अब यह संख्या करीब 1.24 लाख तक पहुंच गई है। उच्च आय, 85% से ज्यादा साक्षरता और डिजिटल अपनाने की बढ़ी क्षमता ने यहां मार्केट को नई ऊर्जा दी है। राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर और भी बड़ी है। अक्टूबर 2025 तक देश में 21 करोड़ से ज्यादा डिमैट अकाउंट हो चुके हैं, और करीब एक लाख नए अकाउंट रोज खुल रहे हैं। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने 10 वर्षों में 7 गुना वृद्धि दर्ज करते हुए अब 80 ट्रिलियन रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।

SEBI चेयरमैन की चेतावनी

लेकिन इस तेजी के बीच SEBI चेयरमैन ने जो चेतावनी दी, वह चौंकाती है। SEBI Investor Survey 2025 के अनुसार सिर्फ 36% निवेशकों को शेयर बाजार का पर्याप्त ज्ञान है जबकि 62% लोग अब भी निवेश सलाह के लिए दोस्तों, रिश्तेदारों या सोशल मीडिया पर निर्भर हैं। तुहिन कांत पांडे ने कहा कि जागरूकता और समझ एक जैसी नहीं होती। बिना जानकारी के भागीदारी लोगों को अनावश्यक खतरे में डालती है।

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