नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी खरीदने की प्लानिंग बना रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्राधिकरण ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और मेट्रो रूट के आसपास भूखंड आवंटन को सस्ता बनाने का फैसला लिया है। लोकेशन चार्ज में भारी कटौती से आने वाली स्कीम में जमीन की कीमतें कम हो सकती हैं, जिससे निवेशकों और उद्यमियों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
एक्सप्रेसवे किनारे खत्म हुआ 7.5% लोकेशन शुल्क
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के नोएडा क्षेत्र में करीब 20 किलोमीटर का हिस्सा आता है। इस क्षेत्र के 40 से ज्यादा सेक्टरों में स्थित भूखंडों पर अब लोकेशन शुल्क नहीं लगेगा। पहले यहां 7.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता था, जिसे अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। यह शुल्क वर्ष 2019 से आईटी, आईटी-इंस्टीट्यूशनल, व्यावसायिक और कॉरपोरेट ऑफिस के भूखंडों पर लागू था। प्राधिकरण के इस फैसले से इन श्रेणियों के भूखंडों की आवंटन कीमतों में सीधी कमी आएगी। इससे औद्योगिक और कॉरपोरेट निवेश को भी बढ़ावा मिल सकता है।
मेट्रो रूट के पास भी बड़ी राहत
मेट्रो कॉरिडोर के 1 किलोमीटर दायरे में आने वाली संपत्तियों पर पहले 10 प्रतिशत तक का लोकेशन शुल्क लगाया जाता था। फरवरी 2025 में यूनिफाइड पॉलिसी के तहत यह शुल्क लागू किया गया था। अब इसे घटाकर मात्र 2.5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह राहत नोएडा प्राधिकरण की हालिया बोर्ड बैठक में मंजूरी के बाद लागू की गई है। इससे दिल्ली मेट्रो की ब्लू, मैजेंटा और एक्वा लाइन के आसपास की संपत्तियों की कीमतों में नरमी आ सकती है।
आने वाली स्कीम पर दिखेगा असर
अधिकारियों के मुताबिक, लोकेशन चार्ज में कटौती का असर जल्द आने वाली विभिन्न भूखंड स्कीम्स में दिखाई देगा। एक्सप्रेसवे और मेट्रो के पास की जमीन आम तौर पर प्रीमियम मानी जाती है, इसलिए वहां एक्स्ट्रा शुल्क जोड़ा जाता था। अब शुल्क घटने या समाप्त होने से निवेशकों के लिए लागत कम होगी और मांग बढ़ने की संभावना है।
निवेशकों के लिए सुनहरा मौका?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ बिजनेस भूखंडों की मांग बढ़ेगी, बल्कि आईटी और कॉरपोरेट सेक्टर को भी प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, मेट्रो कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आवासीय और मिश्रित उपयोग की परियोजनाओं को भी गति मिल सकती है।
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