भारत के हवाई अड्डों में इस बीते हफ्ते सिर्फ अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। इंडिगो नए डीजीसीए नियमों के हिसाब से अपने क्रू की ड्यूटी शेड्यूल नहीं बना सकी, जिसके कारण कई फ्लाइटें रद्द हो गईं। इससे हवाई अड्डों पर लंबी लाइनें लग गईं और यात्री घंटों परेशानी झेलते रहे। इसी बीच अन्य एयरलाइंस की टिकटों की कीमत भी अचानक काफी बढ़ गई। दिल्ली से मुंबई तक का किराया 51,000 रुपये तक पहुंच गया, जबकि फ्लाइटें पहले से ही पूरी भरी हुई थीं।ऐसे में सवाल यह है कि जब किराया इतना हाई है और फ्लाइटें भी फुल हैं, तो फिर एयरलाइंस मुनाफा क्यों नहीं कमा रहीं? चलिए जानते हैं।
सिर्फ इंडिगो ही मुनाफे में क्यों?
एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 से 2024 के बीच घरेलू टिकट किराए 43% बढ़े। 2025 में भी महंगाई जारी है। इसके बावजूद एयर इंडिया का FY25 में घाटा 10,859 करोड़ रुपये रहा। वहीं, स्पाइसजेट मुश्किल से टिक पाई और अकासा भी दमदार प्रदर्शन नहीं कर पाई। जबकि गो फर्स्ट और जेट एयरवेज पहले ही बंद हो चुकी हैं। यानी, भारत में सिर्फ इंडिगो ही मुनाफा कमा पा रही है, जबकि मार्केट का 60% हिस्सा उसी के पास है। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारतीय एविएशन सेक्टर गहरे संकट में है।
क्यों डूब रही हैं भारतीय एयरलाइंस?
भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल दुनिया में सबसे महंगा है, क्योंकि इसे जीएसटी से बाहर रखा गया है और केंद्र व राज्य दोनों भारी टैक्स लगाते हैं। एयरलाइंस की 40-50% लागत सिर्फ ईंधन होती है।
- महंगा लीजिंग और डॉलर का प्रहार
विमानों को लीज पर लेना पहले से ज्यादा महंगा हो चुका है। डॉलर में भुगतान की वजह से ₹90 प्रति डॉलर के कमजोर रुपये का सीधा असर एयरलाइंस की जेब पर पड़ता है।
दुनिया में ज्यादातर लो-कॉस्ट एयरलाइनें सस्ते और छोटे एयरपोर्ट से उड़ान भरती हैं, जिससे उनका खर्च कम होता है। लेकिन भारत में ऐसा बिल्कुल नहीं है। यहां लगभग सभी एयरपोर्ट बड़े, महंगे और हाई-एंड हैं। इस वजह से कम खर्च में चलने वाली एयरलाइंस भी ज्यादा खर्च उठाने को मजबूर हो जाती हैं। जिसके चलते लो-कॉस्ट एयरलाइनें भी हाई-कॉस्ट पर चलती हैं, इसलिए उन्हें मुनाफा कमाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
- मार्केट में मुकाबला लगभग खत्म
इंडिगो की विशाल पकड़ ने कई रूट्स पर प्रतियोगिता खत्म कर दी। जहां मुकाबला नहीं, वहां टिकट महंगे। जहां मुकाबला है, वहां इंडिगो दूसरों को कमजोर करने तक कम दाम रख देती है।
आगे क्या?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत को बचाने के लिए तीन बड़े कदम जरूरी हैं-
- ATF को GST में शामिल करें
- सेकेंडरी एयरपोर्ट्स विकसित करें
- रेगुलेशन को सरल बनाएं
जब तक सरकार और एयरलाइंस मिलकर सिस्टम में बड़े बदलाव नहीं करेंगे, तब तक नई कंपनियां ज्यादा समय तक चल नहीं पाएंगी और जो एयरलाइंस अभी चल रही हैं, वे भी ठीक से मुनाफा नहीं कमा सकेंगी।
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