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Hindi News पैसा बिज़नेस Zepto का मास्टरस्ट्रोक: कस्टमर्स को लुभाने के लिए दिया बड़ा तोहफा, Blinkit और Swiggy में मच गई हलचल!

Zepto का मास्टरस्ट्रोक: कस्टमर्स को लुभाने के लिए दिया बड़ा तोहफा, Blinkit और Swiggy में मच गई हलचल!

क्विक डिलीवरी की दुनिया में धमाकेदार मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। जेप्टो ने ग्राहकों को खुश करने के लिए ऐसा कदम उठा लिया है, जिससे उसके प्रतिद्वंद्वी ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट में हलचल मच गई है।

Zepto ने यूजर्स को दिया...- India TV Paisa Image Source : OFFICIAL WEBSITE Zepto ने यूजर्स को दिया बड़ा तोहफा

क्विक कॉमर्स मार्केट में मची जबरदस्त कॉम्पिटिशन के बीच जेप्टो (Zepto) ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट दोनों में खलबली मच गई है। 10 मिनट में ग्रोसरी और जरूरी सामान डिलीवर करने वाले इस प्लेटफॉर्म ने अब ग्राहकों के लिए सभी तरह के हैंडलिंग फीस और सर्ज चार्ज पूरी तरह खत्म कर दिए हैं। इतना ही नहीं, 99 रुपये से ज्यादा के ऑर्डर पर अब किसी भी तरह की डिलीवरी फीस भी नहीं लगेगी।

नई पॉलिसी के तहत अब जेप्टो पर हर ऑर्डर पर जीरो हैंडलिंग फीस, जीरो रेन और सर्ज चार्ज रहेगा। केवल 99 रुपये से नीचे के ऑर्डर पर 30 रुपये की डिलीवरी फीस देनी होगी, लेकिन कंपनी ने इस पर भी स्मॉल कार्ट फीस हटा दी है। इतना ही नहीं, सिगरेट और तंबाकू जैसे चीजों पर लगने वाली कन्वीनियंस फीस भी पूरी तरह खत्म कर दी गई है।

ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट को चुनौती

जेप्टो के इस कदम ने सीधे तौर पर ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट को चुनौती दी है। एक तुलना में सामने आया कि जहां Zepto 99 रुपये से नीचे के ऑर्डर पर सिर्फ 30 रुपये फीस ले रहा है, वहीं ब्लिंकिट 54 रुपये और इंस्टामार्ट करीब 65 रुपये तक वसूल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, ब्लिंकिट पर 89 रुपये के आइटम की कुल कीमत 143 रुपये तक पहुंचती है, जबकि जेप्टो पर वही सामान केवल 115.50 रुपये में मिल रहा है। वहीं, इंस्टामार्ट पर यही ऑर्डर 154 रुपये का पड़ता है।

जेप्टो की तगड़ी चाल

99 रुपये से ऊपर के ऑर्डर पर जेप्टो सभी चार्ज पूरी तरह हटा रहा है, जबकि ब्लिंकिट और स्विगी अब भी 199 रुपये तक के ऑर्डर पर डिलीवरी या हैंडलिंग फीस वसूलते हैं। यानी ग्राहक को उतनी ही खरीदारी में जेप्टो पर सीधी बचत हो रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जेप्टो की यह अट्रैक्टिव स्ट्रैटेजी ग्राहकों का भरोसा जीतने और मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए है। हालांकि, यह मॉडल लंबे समय तक टिकेगा या नहीं, इस पर सवाल भी उठ रहे हैं क्योंकि क्विक कॉमर्स कंपनियां पहले से ही मुनाफे के दबाव में हैं।

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