Stock Market crashed: बजट 2026 के ऐलान के बाद शेयर बाजार में निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 के कुछ फैसलों ने बाजार में भारी बेचैनी पैदा कर दी। खासकर फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ोतरी की घोषणा ने निवेशकों की धारणा को झटका दिया। इसके चलते सेंसेक्स में एक झटके में 2300 अंकों की गिरावट देखने को मिली और निफ्टी भी पिछले सत्र की तुलना में 700 अंक नीचे बंद हुआ।
बाजार में गिरावट के तीन बड़े कारण
- F&O पर टैक्स में वृद्धि: सरकार ने फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर लगने वाले टैक्स की दरों को बढ़ा दिया है। सेबी (SEBI) की हालिया रिपोर्ट्स में बार-बार चेतावनी दी गई थी कि 90% से अधिक रिटेल ट्रेडर्स F&O में पैसा गंवा रहे हैं। इसे हतोत्साहित करने के लिए सरकार ने टैक्स का सहारा लिया है।
- कैपिटल गेन्स का डर: निवेशकों को उम्मीद थी कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) में राहत मिलेगी, लेकिन बजट में इस मोर्चे पर कोई बड़ी ढील न मिलने से निराशा बढ़ गई।
- राजकोषीय घाटा और बॉन्ड यील्ड: राजकोषीय घाटे के आंकड़ों और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने बैंकिंग शेयरों पर दबाव डाला, जिससे निफ्टी बैंक भी बुरी तरह टूट गया।
बाजार का हाल: चौतरफा बिकवाली
बजट भाषण के बीच ही सेंसेक्स और निफ्टी ने गोता लगाना शुरू कर दिया। सेंसेक्स 2300 अंकों की गिरावट के साथ 80,000 के स्तर के नीचे खिसक गया, वहीं निफ्टी 50 में भी 700 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई। कुछ ही मिनटों के भीतर निवेशकों के लाख करोड़ की संपत्ति स्वाहा हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग, आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी।
एक्सपर्ट की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स बढ़ने से बाजार में लिक्विडिटी कम हो सकती है। शॉर्ट टर्म में बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। हालांकि, सरकार का तर्क है कि इससे निवेशक 'गेमिंग' के बजाय लंबे समय के लिए सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षित होंगे।
Latest Business News