दलाल स्ट्रीट पर आने वाला हफ्ता निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाला है। घरेलू आर्थिक आंकड़े, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी आशंकाएं बाजार की दिशा तय करेंगी। विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल रहेगा और निवेशक बड़े संकेतों का इंतजार करेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा से जुड़ी उम्मीदें बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। मजबूत अमेरिकी रोजगार डेटा ने ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है, जिससे वैश्विक बाजारों में दबाव देखा जा रहा है। इसके अलावा FOMC की बैठक के मिनट्स भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे। AI से जुड़े संभावित व्यवधानों ने खासतौर पर टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बनाया है। हालिया ग्लोबल सेल-ऑफ का असर भारतीय आईटी सेक्टर पर भी पड़ा, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पिछले हफ्ते गिरावट में बंद हुए।
घरेलू आंकड़े भी रहेंगे अहम
इस सप्ताह थोक महंगाई (WPI), व्यापार संतुलन, HSBC फ्लैश PMI (मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज) और बैंक लोन वृद्धि जैसे आंकड़े जारी होंगे। ये डेटा आर्थिक गतिविधियों और मांग के रुझान का संकेत देंगे। साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री और रुपये की चाल भी बाजार की दिशा तय करेगी। रुपये में हल्की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों को फिलहाल सतर्क रखा है।
सेक्टर रोटेशन की संभावना
विश्लेषकों का मानना है कि आईटी और मेटल सेक्टर पर बाहरी दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में बाजार की अगुवाई बैंकिंग, ऑटो और घरेलू खपत आधारित सेक्टर कर सकते हैं। बेहतर वैल्यूएशन और सकारात्मक जीडीपी अनुमान विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन व्यापक सूचकांक फिलहाल सीमित दायरे में ही कारोबार कर सकते हैं।
पिछला हफ्ता क्यों रहा कमजोर?
बीते सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 953 अंकों से ज्यादा टूटा, जबकि निफ्टी में भी गिरावट दर्ज की गई। टेक शेयरों में बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा कमजोर की।
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