आज की युवा पीढ़ी 40 की उम्र तक करोड़पति बनने का सपना देखती है। लेकिन क्या सिर्फ हाई रिटर्न वाले फंड में निवेश करना ही इस टारगेट को हासिल करने के लिए काफी है? रिटायरमेंट स्ट्रैटेजिस्ट मिलिंद देवगांवकरका मानना है कि 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाने का असली राज रिटर्न नहीं, बल्कि कंसिस्टेंसी यानी निरंतरता में छिपा है।
देवगांवकर ने अपने एक LinkedIn पोस्ट में लिखा कि हर महीने मुझे अपने लेट-20s के क्लाइंट्स से ये सुनने को मिलता है कि मैं 40 तक करोड़पति बनना चाहता हूं। लेकिन सच्चाई ये है कि ज्यादातर लोग 15 साल तक लगातार निवेश नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि उनके एक्सपीरिएंस में हर 10 में से 6 इन्वेस्टर 3 से 5 साल के भीतर ही अपनी SIP बंद या रोक देते हैं।
क्यों नहीं बन पाता 1 करोड़ का कॉर्पस?
एक्सपर्ट के मुताबिक, शादी, घर की डाउन पेमेंट, कार खरीदना या नौकरी बदलने जैसी वजहों से लोग अपने निवेश बीच में निकाल लेते हैं। कागज पर गणित बहुत अच्छा दिखता है, लेकिन असली चैलेंज है निवेश को जारी रखना है, चाहे बाजार गिरे, नौकरी जाए या परिवार में इमरजेंसी आ जाए।
कैसे पाएं टारगेट?
देवगांवकर ने दो उदाहरण देकर समझाया कि अगर आप 25 साल के हैं और सालाना 12 लाख रुपये कमाते हैं, तो आपको हर महीने करीब 21,500 रुपये SIP करनी होगी। वहीं अगर आप 30 की उम्र में शुरू करते हैं और सालाना 18 लाख रुपये कमाते हैं, तो हर महीने 45,000 रुपये SIP करनी होगी। दोनों मामलों में 12% CAGR के साथ ही आप 40 की उम्र तक 1 करोड़ का टारगेट पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए अनुशासन और लाइफस्टाइल कंट्रोल जरूरी है।
एक्सपर्ट की सलाह
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जल्दी शुरुआत करें: 25 की उम्र में 5000 रुपये लगाना, 32 में 15,000 रुपये लगाने से बेहतर है।
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रिटर्न नहीं, निरंतरता पर ध्यान दें: जो निवेशक हर गिरावट में SIP रोक देते हैं, वे आखिर में नुकसान में रहते हैं।
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महंगाई को न भूलें: 6% इंफ्लेशन के साथ 40 पर 1 करोड़ की वैल्यू आज के हिसाब से सिर्फ 55 लाख रुपये बचेगी।
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