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EXCLUSIVE: मध्य-पूर्व की जंग में दोहराई जा रही हिटलर वाली गलती? एक्सपर्ट ने बताई ईरानी स्ट्रैटेजी की सबसे बड़ी खामी

Israel Iran Conflict: ईरान, खाड़ी देशों में अमेरिकी मिलिट्री बेस के अलावा होटल, मॉल और एयरपोर्ट पर हमला करके आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। जानें एक्सपर्ट राजीव कुमार नारंग ने इसे ईरान की ऐतिहासिक गलती क्यों बताया।

iran israel war- India TV Hindi
Image Source : AP आम नागरिकों को निशाना बनाकर ईरान रणनीतिक गलती कर रहा है।

Iran Israel War: क्या ईरान दूसरे विश्व युद्ध में एडोल्फ हिटलर की तरफ से की गई उस सबसे बड़ी भूल को दोहरा रहा है, जिसने जर्मनी की हार में अहम रोल निभाया? इजरायल और खाड़ी देशों में मिलिट्री बेस के साथ ही होटल, मॉल और एयरपोर्ट्स पर मिसाइलें दागकर ईरान पूरी दुनिया का ध्यान तो खींच रहा है, लेकिन क्या सच में वह इससे अपनी ही स्ट्रैटेजिक हार तय कर रहा है? इसका जवाब जानने के लिए INDIA TV ने मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के सीनियर फेलो और भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन डॉक्टर राजीव कुमार नारंग से एक्सक्लूसिव बातचीत की, जिसमें उन्होंने ईरान की इस रणनीति के पीछे की खामी और इसके ग्लोबल इम्पैक्ट को डिकोड किया।

हिटलर वाली गलती रिपीट कर रहा ईरान

राजीव कुमार नारंग के मुताबिक, वर्ल्ड वॉर 2 में हिटलर ने भी सिविलियन टारगेट्स को अटैक किया था। यही गलती अब ईरान कर रहा है। वह खाड़ी देशों और इजरायल में आम लोगों को निशाना बना रहा है। होटल, मॉल और एयरपोर्ट जैसी जगहों पर मिसाइल-ड्रोन दाग रहा है। देखिए जब कोई अपने दुश्मन देश के मिलिट्री टारगेट पर हमला करता है तो वह एक मिलिट्री टू मिलिट्री होता है। ऐसा करके वह एक-दूसरे की मिलिट्री कैपेबिलिटी को डीग्रेड करते हैं।

ब्रिटेन से एयर वॉर क्यों हारा था जर्मनी?

उन्होंने आगे कहा, 'जब आप आम नागरिकों को टारगेट करते हैं, तो उसमें आपका जितना भी एफर्ट लगता है, उससे आप अटेंशन जरूर ड्रॉ कर पाते हैं, लेकिन आप उस एफर्ट को अपने एडवर्सरी की कैपेबिलिटी डीग्रेड करने में नहीं इस्तेमाल कर रहे होते हैं। जर्मनी जो एयर वॉर ब्रिटेन के खिलाफ हारा था उसका कारण ही यही था, उन्होंने मिलिट्री टारगेट की जगह सिविलियन टारगेट्स को मारना शुरू कर दिया था। तो मुझे लगता है कि ये एक अच्छी स्ट्रेटेजी नहीं है।'

पब्लिक ओपिनियन हो जाएगा ईरान के खिलाफ

IAF के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन डॉक्टर राजीव कुमार नारंग के अनुसार, जो देश आम नागरिकों को निशाना बनाता है, पब्लिक ओपिनियन उसके खिलाफ हो जाता है। सिविलियन को निशाना बनाने से अटेंशन अट्रैक्ट होती है लेकिन पब्लिक इमेज में इसका नेगेटिव इम्पैक्ट देखा जाता है। तो इसलिए मुझे लगता है ये एक सेंसिबल सब्जेक्ट है और ये ईरान के खिलाफ नेगेटिव ओपिनियन खड़ा कर सकता है।

काउंटर ड्रोन सिस्टम को बनाना होगा मजबूत

काउंटर ड्रोन सिस्टम पर बात करते हुए एक्सपर्ट राजीव कुमार नारंग ने कहा कि देखिए F-15 कुवैत में शूट डाउन हो गए हैं। अब इसमें दोस्त और दुश्मन को डिटेक्ट करना मुश्किल है। जब ड्रोन सीमा में आ गए हों, तब मैन्ड और अनमैन्ड सिस्टम का डिटेक्शन और डिफरेंशिएशन करना मुश्किल हो गया है। और जब ड्रोन, मिसाइल्स और फाइटर एयरक्राफ्ट आएंगे तो आपका काउंटर ड्रोन नेटवर्क बहुत ही क्लियर होना चाहिए। और उसमें ऑटोमेशन बढ़ाना पड़ेगा, तभी इसको सॉल्व कर पाएंगे।

उन्होंने कहा, 'हमारा एक डिजिटल स्काई सिस्टम आया था जो सिविल ड्रोन्स के लिए था। ऐसे ही अनमैन्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम है। और जब तक ये चीजें नहीं आएंगी, तब तक अपने ही जहाज गिरने का खतरा बना रहेगा। इतनी एडवांस कंट्री अपने फाइटर जेट को शूट डाउन कर ले, तो इसका मतलब है कि ये बहुत सीरियस मुद्दा है।'

ऐसा करेंगे तो ड्रोन इंटरसेप्शन होगा इंप्रूव 

एक्सपर्ट राजीव कुमार नारंग ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारा जो काउंटर ड्रोन नेटवर्क है, इसमें सिविल-मिलिट्री ड्रोन्स एंड मैंड एयरक्राफ्ट का इंटीग्रेशन एक मेजर इशू उभरकर आया है। इसमें दूसरा पॉइंट है कि जो नॉन-स्टेल्थ मेल और हेल हैं जैसे हमारा MQ-9B है। ऐसे जितने भी ड्रोन हैं वो ईरान की जंग में इंटरसेप्ट कर लिए गए। तो ऐसे ड्रोन हम जब भी खरीदें, तो मुझे लगता है कि कॉम्बैट के लिए भारत-पाकिस्तान की सिचुएशन में हमें स्टेल्थ हेल ड्रोन की जरूरत होगी। इसलिए हमें स्टेल्थ हेल प्रोग्राम लांच करना चाहिए। और जो हमारा स्टेल्थ घातक प्रोग्राम है उसको जल्दी से हमें अप्रूव करना चाहिए।'

अनमैन्ड ड्रोन इंटीग्रेशन से बढ़ेगी इंटर एजेंसी सर्विस की सिनर्जी 

राजीव कुमार नारंग बोले कि मैन-अनमैन्ड टीमिंग में भी हम स्टेल्थ जहाज बनाने के लिए कोशिश कर रहे हैं। तो हमारे जो मैन-अनमैन्ड और स्टेल्थ सिस्टम हैं, उस पर अधिक ध्यान देना पड़ेगा। इजरायली डिफेंस फोर्सेस की 1 मार्च की स्टेटमेंट में उन्होंने बोला कि हमने 50 से ज्यादा ड्रोन न्यूट्रलाइज किए अपने फाइटर जेट और अटैक हेलीकॉप्टर से, तो मुझे लगता है कि हमारे जो अटैक हेलीकॉप्टर LCH और स्वदेशी फाइटर्स हैं, उनमें अनमैन्ड काउंटर ड्रोन सिस्टम इंटीग्रेट करना चाहिए। ये मेजर लेसन हैं जो भारत को भविष्य की जंग से पहले अधिक सक्षम बनाएंगे।

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