Bihar Assembly Election 2025: कटिहार सीट पर बीजेपी के तारकिशोर प्रसाद लगा पाएंगे जीत का 'पंजा'? जानिए चुनावी इतिहास
Katihar Assembly Election 2025: बिहार की कटिहार सीट पर दूसरे फेज में 11 नवंबर को वोटिंग होगी। इस सीट पर बीजेपी के तारकिशोर प्रसाद लगातार चार बार जीत दर्ज कर चुके हैं।
Katihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान हो गया है। राज्य में दो चरणों में 6 नवंबर और 11 नवंबर को चुनाव संपन्न कराए जाएंगे। चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। इसके मद्देनजर सभी राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। मौजूदा नीतीश कुमार की सरकार ने भी मतदाताओं को साधने के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा की है। इस बार के चुनावी रण में आम आदमी पार्टी (AAP) के अलावा जन सुराज जैसे नए दल भी ताल ठोक रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में से एक अहम सीट कटिहार भी है, जहां दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोटिंग होगी।
क्या रहे पिछले चुनाव के नतीजे?
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कटिहार सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तारकिशोर प्रसाद ने जीत हासिल की थी। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के डॉ. राम प्रकाश महतो को 10,519 वोटों से शिकस्त दी थी। कटिहार सीट पर 2005 से लगातार तारकिशोर प्रसाद जीतते आ रहे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) के बिजय सिंह को शिकस्त दी थी।
2020 के चुनाव नतीजे
- तारकिशोर प्रसाद (BJP): 82,669 वोट (48.47 %)
- डॉ. राम प्रकाश महतो (RJD): 72,150 वोट (72,150%)
- मोहम्मद कलामुद्दीन अंसारी उर्फ कलाम (निर्दलीय): 2,533 वोट (1.49%)
- NOTA: 787 वोट (0.46%)
2015 के चुनाव नतीजे
- तारकिशोर प्रसाद (BJP): 66,048 वोट (42.98%)
- बिजय सिंह (JDU): 51,154 वोट (33.29%)
- जयनंदन पासवान (निर्दलीय): 1,801 वोट (1.17%)
- NOTA: 1,139 वोट (0.74%)
कटिहार सीट का चुनावी इतिहास
बिहार की कटिहार विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास काफी रोचक रहा है, जिसमें कांग्रेस, बीजेपी और आरजेडी जैसी पार्टियों का दबदबा रहा है। इस सीट पर बीजेपी पिछले कई चुनावों से लगातार जीत दर्ज कर रही है। बीजेपी के तारकिशोर प्रसाद इस सीट के सबसे प्रभावशाली नेता रहे हैं। वह लगातार चार बार (अक्टूबर 2005, 2010, 2015 और 2020) इस सीट से विधायक चुने गए हैं। 2020 में उन्होंने राजद के राम प्रकाश महतो को हराया था। 2015 में उन्होंने जेडीयू के बिजय सिंह को हराया था।
1950 के दशक में कांग्रेस ने यहां जीत हासिल की, लेकिन यह वर्चस्व बाद में क्षेत्रीय दलों से टूट गया। 1967 में पहली बार जनसंघ के जगबंधु अधिकारी ने जीत दर्ज की। 1972 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को जीत मिली। 1980 के दशक में कांग्रेस ने वापसी की।
1990 में राम प्रकाश महतो ने जनता दल के टिकट पर जीत हासिल कर मंडल राजनीति के प्रभाव को दर्शाया। 1995 में जगबंधु अधिकारी ने एक बार फिर बीजेपी के टिकट पर वापसी की। 2000 और फरवरी 2005 के चुनावों में राम प्रकाश महतो ने आरजेडी के उम्मीदवार के रूप में सीट जीती।
