बिहार के पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार को Z+ सुरक्षा दी गई है। यह निर्णय उनके राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत लिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दिल्ली में नया सरकारी बंगला भी मिला है। उन्हें सुनहरी बाग रोड स्थित बंगला नंबर-9 आवंटित किया गया है। यह बंगला VIII कैटेगरी का है। इससे पहले नीतीश कुमार को 6, कामराज लेन बंगला आवंटित था।
नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इससे पहले उन्होंने अपना मंत्रिमंडल भी भंग कर दिया था। वह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री विजय चौधरी के साथ इस्तीफा देने के लिए लोक भवन पहुंचे थे और महज सात मिनट में इस्तीफा देकर वापस चले गए थे। इसके बाद बीजेपी ने सम्राट चौधरी की अगुआई में सरकार बनाने का दावा पेश किया। अब साफ हो चुका है कि सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
बिहार में पहली बार बीजेपी की अगुआई में सरकार
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी भाजपा है। अब बीजेपी की अगुआई में ही बिहार में सरकार चलेगी। यह पहली बार है, जब बिहार में बीजेपी की अगुआई में सरकार चलेगी। बिहार विधानसभा में 202 सदस्यीय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में जनता दल (यूनाइटेड) के 85 विधायक, चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के 19 विधायक और जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पांच विधायक शामिल हैं। इसके अलावा राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पांच विधायक भी राजग का हिस्सा हैं।
तेजस्वी ने लगाए थे आरोप
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष नीतीश कुमार अपने ही दल के उन सहयोगियों के "दबाव" में बिहार का मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे हैं, जिन्हें सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा "धमकाया या प्रलोभन दिया गया" है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री यादव ने यह टिप्पणी कुमार के राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के एक दिन बाद की जब कुमार का सामान मुख्यमंत्री आवास से पास की एक गली में स्थित सरकारी बंगले में स्थानांतरित किया जा रहा था। राजद के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए यादव ने कहा, "मेरा मानना है कि नीतीश कुमार को हटाने का सौदा जदयू के कुछ बड़े नेताओं ने बहुत पहले ही कर लिया था। इसे सार्वजनिक नहीं किया गया, क्योंकि विधानसभा चुनावों के दौरान इसका उल्टा असर पड़ सकता था।"
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