नई दिल्ली: देश में अगर प्राइवेट बैंक खोलने की बात हो तो शायद अंबानी, बिड़ला, टाटा, बजाज जैसे अरबपतियों के नाम ही शायद हर भारतीय के जहन में आएंगे। इसके मुख्य कारण दशकों से अपने उत्पादों के माध्यम से करोड़ों लोगों तक बनाई गई पहुंच, ग्राहकों का भरोसा और पूंजी के मामले में इस घरानों का दबदबा आदि हैं। लेकिन इन सबको पीछे रख अगर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक माइक्रोफायनेंस कंपनी चलाने वाले एनजीओ को बैंक चलाने का लाइसेंस देता है तो बात अचम्भे की है। उससे भी बड़ी बात यह है कि इस माइक्रोफाइनेंस कंपनी की बागडोर जिस व्यक्ति के हाथ में है वो भी न तो कभी पावर कॉरिडोर में धमक रखने को लेकर सुर्खियों में आया और न ही बड़े उद्योगपतियों की तरह रसूखदार।
मिलिए बंधन फायनेंसशियल को बैंक लाइसेंस दिलवाने वाली शख्सियत से