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Hindi News क्राइम शेल कंपनियों के जरिए AAP को दिया ₹2 करोड का चंदा, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार

शेल कंपनियों के जरिए AAP को दिया ₹2 करोड का चंदा, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मुकेश कुमार और सुधांशू बंसल नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। 

delhi police arrests two for making shell companies । शेल कंपनियों के जरिए AAP को दिया ₹2 करोड का चं- India TV Hindi Image Source : PTI शेल कंपनियों के जरिए AAP को दिया ₹2 करोड का चंदा, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मुकेश कुमार और सुधांशू बंसल नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर आरोप है कि ये लोग शेल कंपनियां बनाकर मिनी लॉन्ड्रिंग का धंधा करते थे और इन्होंने शेल कंपनियों के जरिए आम आदमी पार्टी को 2 करोड़ रुपये का चंदा भी दिया था। 4 शेल कंपनियों के जरिए 2 करोड़ रुपये का चंदा साल 2014 में दिया गया था। 

ये लोग फ़र्ज़ी दस्तावेजों और फ़ोटो के आधार पर पहले फ़र्ज़ी कम्पनी बनते और फिर उन कम्पनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और एंट्री ऑपरेशन के काम करते थे। दरअसल दिल्ली पुलिस को कम्पनी रजिस्ट्रार के दफ्तर की तरफ से एक शिकायत मिली थी जिसके बाद दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक शिकायत दर्ज की थी। यह शिकायत गोल्डमाइन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, स्काईलाइन मेटल एंड एलॉयज प्राइवेट लिमिटेड, सनविजन एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड औऱ इनफ्लुएंस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन लिमिटेड के खिलाफ दर्ज की गई।

दरअसल रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के तरफ से यह शिकायत दी गई थी कि इन चार कंपनियों की तरफ से साल 2014 में 50-50 लाख रुपये आम आदमी पार्टी को चंदा दिया गया।  जब आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में जांच की तो पता चला कि इन चार कंपनियों का का पता नकली था। EOW को यह भी जानकारी मिली कि 

  • ये चारों कंपनियां नकली है, और जो पता इन्होंने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में दर्ज कराया है उस जगह पर कंपनियां नही है।
  • इन कंपनियों में प्रीमियम शेयर के जरिये पैसे आये लेकिन वो पैसे कहाँ से आये इसकी जानकारी नही मिली।
  • रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने चारों कंपनियों के निदेशकों को नोटिस भेजा लेकिन सिर्फ एक कंपनी स्काइलाइन मेटल एंड अलॉय की तरफ एक शख्स आया और उसने कहा कि फ़ोटो और दस्तखत उसके नही है।
  • इसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की शिकायत पर आर्थिक अपराध शाखा ने नवम्बर 2015 में इस मामले में एक एफआईआर दर्ज की। और जांच शुरू की।

पुलिस की जांच में ये भी पता चला कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने धोखाधड़ी से DIN प्राप्त किया।  इसके बाद इन लोगों ने शेल कंपनी बनाई, और इन शेल कम्पनी के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग की और दूसरे अवैध काम किये।

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