'AI के दौर में बौद्धिक संपदा (IP) को बदलना होगा', AI इम्पैक्ट समिट के सेशन में बोलीं जस्टिस प्रतिभा सिंह
भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट के एक सेशन में दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) को अब बदलना होगा।
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा सिंह ने शुक्रवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मामले में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मौजूदा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी फ्रेमवर्क इंसानी क्रिएटिविटी को इनाम देने के लिए बनाए गए थे और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ने से उन्हें चुनौती मिल रही है। जस्टिस सिंह नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 में बोल रही थीं। उन्होंने 'हेल्थ में इक्विटेबल और रिस्पॉन्सिबल AI के लिए ग्लोबल इन्वेस्टमेंट को कैटलाइज़ करना' टाइटल वाले सेशन में अपनी बात रखी। इसका आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और IndiaAI द्वारा किया गया था।
इन सवालों की ओर दिलाया ध्यान
उन्होंने पूछा, “क्या हमें TRIPS एग्रीमेंट (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के ट्रेड-रिलेटेड एस्पेक्ट्स पर एग्रीमेंट) को फिर से लिखना होगा? क्या हमें WTO ट्रीटीज़ को फिर से लिखना या उन पर फिर से बातचीत करनी होगी? क्या हमें देशों में पेटेंट कानूनों को फिर से लागू करना होगा?”
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से होने वाले इनोवेशन के इन्वेंटरशिप और ओनरशिप के बारे में अनसुलझे सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, “क्या हम जॉइंट ऑथरशिप देते हैं? क्या हम जॉइंट ओनरशिप देते हैं? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एरिया में पेटेंट देने के लिए किस हद तक इंसानी दखल की ज़रूरत होती है?”
AI और हेल्थ
जस्टिस सिंह ने यह भी बताया कि सितंबर 2024 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) की एक टीम ने उनसे AI और हेल्थ में कानूनी बातों पर एक ग्लोबल गाइडेंस डॉक्यूमेंट की ड्राफ्टिंग की को-चेयर करने के लिए संपर्क किया था। जस्टिस सिंह ने कहा, “AI और हेल्थ के संदर्भ में कोई यूनिफॉर्म आधारित डॉक्यूमेंट या बुनियादी सिद्धांत मौजूद नहीं हैं।”
रेगुलेटरी सिस्टम और फ्रेमवर्क
उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट फ्रेमवर्क कानूनी स्टैंडर्ड, रेगुलेटरी ओवरसाइट और इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी बिल्डिंग पर फोकस करता है। “यह बहुत ज़रूरी है कि हम इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग चमकदार AI टूल्स पर नहीं...बल्कि उन रेगुलेटरी सिस्टम और फ्रेमवर्क पर करें जिन्हें देशों को बनाने की ज़रूरत है।”
इन चुनौतियों पर दिया जोर
जस्टिस सिंह ने डेटा प्रोटेक्शन, प्राइवेसी, लायबिलिटी फ्रेमवर्क, मरीज़ों के अधिकार और क्रॉस-बॉर्डर कम्प्लायंस सहित मुख्य रेगुलेटरी चुनौतियों पर ज़ोर दिया, और यूनिफॉर्म ग्लोबल स्टैंडर्ड की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा,“कुछ लायबिलिटी फ्रेमवर्क हैं जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। कुछ यूनिफॉर्म स्टैंडर्ड होने चाहिए जो हमारे पास होने चाहिए।”
इंडिया हेल्थ स्टैक की संभावना
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की बात करते हुए, जस्टिस प्रतिभा सिंह ने रेगुलेटरी निगरानी में इनोवेशन को मुमकिन बनाने के लिए इंडिया हेल्थ स्टैक की संभावना का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) पहले ही हज़ारों अस्पतालों को नेक्स्ट-जेनरेशन सिस्टम से जोड़ चुका है।
हेल्थ सेक्टर में मानव निगरानी
आखिर में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हेल्थकेयर सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मरीज़-केंद्रित रहना चाहिए और इंसानी निगरानी में रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें मरीज़-केंद्रित नज़रिया अपनाने की ज़रूरत है… जिसमें इंसानी निगरानी हो क्योंकि इंसानी निगरानी के बिना, AI और हेल्थ फेल हो जाएंगे।”
