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Hindi News दिल्ली पूरे साल जहरीली बनी रहती है दिल्ली की हवा, रेस्पिरर लिविंग साइंस की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

पूरे साल जहरीली बनी रहती है दिल्ली की हवा, रेस्पिरर लिविंग साइंस की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

दिल्ली की हवा सिर्फ सर्दियों में नहीं बल्कि पूरे साल जहरीली बनी रहती है। रेस्पिरर लिविंग साइंस की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। जानिए रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

दिल्ली में वायु प्रदूषण- India TV Hindi दिल्ली में वायु प्रदूषण

सर्दियों के मौसम में दिल्ली की हवा जहरीली बनी रहती है और लोगों का सांस लेना मुश्किल बना रहता है लेकिन अब रिपोर्ट बता रही है कि दिल्ली की हवा में जहर सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं है, बल्कि सालों भर हवा में जहर घुला रहता है यानी हर मौसम में दिल्ली की हवा प्रदूषित रहती है। रेस्पिरर लिविंग साइंस ने अपनी रिपार्ट में ये दावा किया है। इस रिपोर्ट में एटलसAQ से लिए गए डेटा के आधार पर बीते चार साल का विश्लेषण किया गया है और इसके आधार पर बताया गया है कि दिल्ली में पीएम 10 का स्तर पूरे साल तय मानकों से अधिक बना रहता है।

रेस्पिरर लिविंग साइंसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति बदलती रहती है और सर्दियों में तो हर सप्ताह प्रदूषण में वृद्धि दर्ज की जाती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिल्ली का औसत पीएम 2.5 स्तर 243.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। जारी की गई इस रिपोर्ट में हाइपरलोकल वायु गुणवत्ता निगरानी का उपयोग करके शहरी भारत में प्रदूषण के हॉटस्पॉट की पहचान की गई है।

जानिए क्या कहती है रिपोर्ट?

  • रिपोर्ट में 500x500 मीटर के रिज़ॉल्यूशन के साथ वायु गुणवत्ता के रुझान दिखाए गए हैं, जिससे नीति निर्माताओं, शहरी योजनाकारों और नागरिकों को कार्रवाई योग्य जानकारी प्राप्त हो रही है।
     
  • रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सार्वजनिक भागीदारी व्यक्तिगत जागरूकता बढ़ाने के अलावा स्वच्छ शहरों के लिए साझा इच्छा को बढ़ावा देती है। 
     
  • दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित उत्तरी क्षेत्रों में गंभीर प्रदूषण की घटनाएं जारी हैं, लेकिन वाराणसी जैसे शहरों ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 
     
  • संक्षेप में, रेस्पिरर लिविंग साइंसेज की रिपोर्ट में भारत में वायु गुणवत्ता की स्थिति और प्रदूषण के हॉटस्पॉट के बारे में चिंताजनक जानकारी दी गई है।
     
  • रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सार्वजनिक भागीदारी और हाइपरलोकल वायु गुणवत्ता निगरानी प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकती है।