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महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष पर भड़कीं सीएम रेखा गुप्ता, बोलीं- 'लोकतंत्र में एक काला अध्याय जुड़ गया'

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर विपक्ष पर भड़क उठीं। उन्होंने कहा कि 16, 17 और 18 अप्रैल हमारे लोकतंत्र के एक काले अध्याय के रूप में कहीं ना कहीं जुड़ गया है।

cm rekha gupta delhi assembly women reservation- India TV Hindi
Image Source : X (@REKHAGUPRA) विपक्ष पर भड़कीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को विधानसभा में महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखी। इसके साथ ही दिल्ली विधानसभा में लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने को लेकर विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के पास न होने की घटना को भारतीय लोकतंत्र का 'काला अध्याय' बताया है। सीएम रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन के दौरान कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने तय कर के रखा था कि ये बिल पास नहीं होना चाहिए।

'महिला और पुरुष की परिस्थितियां बहुत अलग-अलग'

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- “क्यों जरूरत पड़ी इस महिला आरक्षण की? यह एक बहुत बड़ा प्रश्न हमारे समाज के आगे बार-बार आता है। हमारे भारत देश में महिला और पुरुष की परिस्थितियां दोनों बहुत अलग-अलग हैं। एक महिला समाज की अपेक्षाओं को अपने ऊपर रखकर जब चलती है तो वह उस स्पीड में, उस गति में आगे नहीं बढ़ पाती जिससे कि एक पुरुष आगे बढ़ पाता है। वह अगर घर से बाहर निकलती है तो उसको सैकड़ों सवालों के जवाब देने पड़ते हैं। ऐसे में जब संविधान हमें जमीन देता है, पार्टी हमें मौका देती है और जनता अपना आशीर्वाद देती है, तब जा करके कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि बनता है।तब जा करके कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि बनता है। संगठन में पार्टी ने हमें मौका दिया। संविधान ने निगम में जो रिजर्वेशन की जमीन दी, जनता ने आशीर्वाद दिया। तब जन सेवा की इस दहलीज पे मेरे जैसी दिल्ली की एक साधारण परिवार की बेटी ने कदम रखा। इसमें हमारे नेतृत्व का प्रधानमंत्री का बहुत बड़ा आशीर्वाद हमें मिला।”

'10% महिलाएं ही विधानसभा पहुंचती हैं'

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा- "पूरे देश में लगभग 15 लाख ऐसी महिलाएं हैं जो पंचायत स्तर पर, निगम के स्तर पर चुनकर आती हैं। पर विधान सभा जाते-जाते, विधान सभा तक पहुंचते-पहुंचते, मैं आपको बताना चाहूंगी कि 4600 सदस्य पूरे देश में विधानसभा सदस्य हैं, पर उसमें से मात्र 10% महिलाएं ही विधान सभा तक पहुंच पाती हैं और इसी तरह लोकसभा तक पहुंचते-पहुंचते वह संख्या इसी तरह कम रहती है। 13 से 14% आज की वर्तमान लोकसभा में, राज्यसभा में भी इतनी महिलाएं हैं। जब संविधान बना, तो संविधान सभा की सदस्य 15 महिलाएं भी थीं। जब संविधान लिखा गया तो बहुत सारी समानता का अधिकार दे दिया: वोट का अधिकार दे दिया, चुनाव लड़ने का अधिकार दे दिया। उन्हें लगा कि बस इतने से आजाद भारत में महिलाएं तरक्की कर जाएंगी, पर उन्हें नहीं मालूम था कि आजाद भारत के यह राजनैतिक दल महिलाओं को कभी आगे आने ही नहीं देंगे। कभी नहीं आगे आने देंगे। वह समानता का अधिकार केवल काफी नहीं था। महिलाएं आज भी उस हकीकत का सामना कर रही हैं जिसमें उन्हें वह मौके नहीं दिए जाते।"

विपक्ष ने अनेक-अनेक अड़ंगे लगाए- सीएम रेखा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- “यदि कोई एक व्यक्ति महिलाओं के हित में सोचने वाला, साहस के साथ उनके साथ खड़े रहने वाला मिला, तो वह देश के प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी। 2014 के बाद जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, मोदी प्रधानमंत्री बने। तब से ही इस देश में महिलाओं की स्थिति में सुधार आना शुरू हुआ। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 लेकर आए। सबको निवेदन करके, सबसे बातचीत करते हुए उन्होंने इसे सदन पटल पर पास करवाया। परंतु फिर यह ध्यान में आया कि जिस गति से या जो जितनी इसमें टेक्निकल फॉर्मेलिटीज हैं, परिसीमन की, डीलिमिटेशन की और उसके बाद यह शायद 2034 तक भी महिलाओं को रिजर्वेशन मिलना आसान नहीं दिख रहा है। और इसीलिए मोदी जी ने एक अमेंडमेंट के साथ में फिर से इसको प्रस्तुत किया कि बहनों को 2029 तक उस लोकसभा चुनाव में 33% आरक्षण दे दिया जाए। इसके लिए कुछ संशोधन जरूरी हैं और उन्होंने वह संशोधन रखे। पर यह विपक्षी तो पहले से ही तय करके बैठे थे कि हम तो इसे पास होने ही नहीं देंगे और इसीलिए उन्होंने अनेक-अनेक अड़ंगे लगाए।"

'महिला आरक्षण बिल 7 बार लोकसभा में आया'

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा- “27 साल के इतिहास में, यह महिला आरक्षण बिल सात बार लोकसभा के पटल पर रखा गया। सात बार, एक बार, दो बार नहीं, सात बार! कभी इसे फाड़ा गया, कभी इसे जलाया गया, और कभी इसका विरोध किया गया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, डीएमके, टीएमसी सबने मिलकर इस बिल के रास्ते में कांटे बिछाए। 'पास नहीं होना चाहिए,' यह उन्होंने तय कर रखा था। किसी महिला को आगे नहीं आने देना है, नेतृत्व नहीं देना है। महिलाएं यदि नेतृत्व करेंगी, साधारण परिवार की महिलाएं तो इनकी परिवारवादी राजनीति का क्या होगा, यह उनकी चिंता थी। 'कि फिर हमारे परिवार की महिलाओं का क्या होगा, और शायद यह भी कि हमारा क्या होगा, अगर यह 33% आकर के हमारे सामने खड़ी होंगी, तो हमारी सत्ता और हमारा सिंहासन हिल जाएगा।”

'लोकतंत्र में एक काला अध्याय जुड़ा'

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- “16, 17 और 18 अप्रैल हमारे लोकतंत्र के एक काले अध्याय के रूप में कहीं ना कहीं जुड़ गया है। वो तीन दिन जब पूरे के पूरे देश की हर महिला लोकसभा की ओर देख रही थी कि 78 साल का इंतजार शायद अब खत्म होने वाला है। पर अफसोस कि वह 16 और 17 को जितनी चर्चाएं लोकसभा में हुई वह बहुत ही निराशा देने वाली थी।”

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