दिल्ली में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के वकील की कार के ऊपर फायरिंग, मचा हड़कंप, पुलिस जांच में जुटी
दिल्ली में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के वकील की कार के ऊपर फायरिंग हुई है। इस घटना से दिल्ली में हड़कंप मच गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
नई दिल्ली: दिल्ली में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के वकील की कार के ऊपर फायरिंग हुई है। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस इस घटना की जांच में जुट गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के आईएसबीटी के पास अज्ञात बदमाशों ने लॉरेंस बिश्नोई के वकील की कार के ऊपर गोलियां चलाई हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, इस घटना में एक शख्स घायल है, उसे 2 गोलियां लगी हैं। पुलिस ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिली है और वे विवरणों की पुष्टि कर रहे हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि टीमें घटनास्थल पर भेजी गई हैं और घटनाक्रम का पता लगाने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
लॉरेंस बिश्नोई कौन है?
लॉरेंस बिश्नोई भारत का सबसे चर्चित और खतरनाक गैंगस्टर है। उसका जन्म 12 फरवरी 1993 को पंजाब के फाजिल्का जिले के छोटे से गांव दुतारनवाली में हुआ था। शुरुआती दिनों में वो कॉलेज में छात्र राजनीति में काफी सक्रिय रहा, लेकिन बाद में वो अपराध की राह पर चल पड़ा और धीरे-धीरे एक बड़े संगठित गिरोह का मुखिया बन गया।
2015 से वो लगातार जेल में बंद है, उसे मुख्य रूप से गुजरात की साबरमती जेल में उच्च सुरक्षा वाली कोठरी में रखा गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि जेल के अंदर से ही वो अपना अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चला रहा है, जिसमें हत्या, फिरौती, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
उसके गिरोह के सदस्य भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा कनाडा, नेपाल जैसे देशों में भी सक्रिय बताए जाते हैं। उसने सबसे ज्यादा सुर्खियां तब बटोरीं जब 2022 में मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में उसका नाम जुड़ा। उसके गिरोह ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली थी, हालांकि लॉरेंस खुद जेल में था।
एनआईए ने उसे एक बड़े ट्रांसनेशनल क्राइम सिंडिकेट का सरगना करार दिया है, जिसमें कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं और धमकियों का जुड़ाव बताया जाता है। शारीरिक बनावट की बात करें तो लॉरेंस कद में औसत (लगभग 5 फीट 7 इंच) और काफी दुबला-पतला है। अदालत में पेश होने पर अक्सर वो दाढ़ी-मूंछ रखे दिखता है।
खालिस्तान मुद्दे पर उसने पिछले कुछ सालों में एक इंटरव्यू में साफ कहा था कि वो खालिस्तान की मांग का विरोध करता है और खुद को राष्ट्र-विरोधी नहीं मानता।
