कौन हैं संसद को डायनामाइट से उड़ाने की धमकी देने वाले पूर्व विधायक किशोर समरीते? दिल्ली कोर्ट ने ठहराया दोषी
कोर्ट ने पूर्व विधायक को भारतीय दंड संहिता की धारा 506 भाग 2 (जान से मारने या गंभीर रूप से चोट पहुंचाने की धमकी) के तहत दोषी ठहराया, जिसके लिए अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। अब इस मामले की सुनवाई 27 फरवरी को है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक किशोर समरीते को संसद को डायनामाइट से उड़ाने की धमकी देने के आरोप में दोषी ठहराया है। हालांकि, उन्हें विस्फोटक अधिनियम के तहत अपराध से बरी कर दिया गया है। बालाघाट जिले के लांजी से पूर्व विधायक किशोर समरीते ने सितंबर 2022 में राज्यसभा के महासचिव को एक धमकी भरा पत्र (कुछ मांगों से युक्त) और एक संदिग्ध पदार्थ भेजकर भारत की संसद को डायनामाइट से उड़ाने की धमकी दी थी।
2022 में दर्ज की गई एफआईआर
अंतर-राज्यीय सेल (ISC), अपराध शाखा दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर विवेक मलिक द्वारा 16 सितंबर, 2022 को की गई शिकायत पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने किशोर समरीते को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 5(ए) और विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9बी(1)(बी) के तहत आरोप से बरी कर दिया।
दिल्ली पुलिस ने तय किए थे आरोप
कोर्ट ने 18 फरवरी को कहा , 'अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य उचित संदेह से परे सबूत पेश करते हैं कि आरोपी किशोर समरीते ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 भाग II के तहत दंडनीय अपराध किया है।' जांच के बाद, दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र दायर किया और समरीते के खिलाफ आरोप तय किए गए। आरोपपत्र के अनुसार, आरोपी को राज्य और केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार की मौजूदा नीतियों के खिलाफ शिकायत थी, उसने 'कुछ बड़ा' करने का फैसला किया। इसलिए उसने सरकार के समक्ष अपनी मांगों का उल्लेख करते हुए एक शिकायत/ज्ञापन तैयार किया।
ऐसे दी गई धमकी
इस शिकायत को उसके अंशकालिक टाइपिस्ट दिनेश पटेल ने भोपाल में अपने किराए के आवास पर टाइप किया था। आरोपी ने शिकायत के प्रत्येक कागज पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद उसने वेबसाइटों और अन्य स्रोतों से विभिन्न दस्तावेज एकत्र किए और उन्हें शिकायत में संलग्न किया। आगे कहा गया कि उन्होंने 17 पार्सल में से प्रत्येक के लिए भारत के संविधान की पुस्तक और राष्ट्रीय ध्वज खरीदा ताकि इन्हें भारत के राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्यसभा और लोकसभा के महासचिव आदि सहित संबंधित गणमान्य व्यक्तियों तक पहुँचाया जा सके।
खास तरीख और समय पर संसद को उड़ाने की धमकी
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा है कि धमकी भरे पत्र में स्पष्ट रूप से भारत की संसद को डायनामाइट का उपयोग करके 30.09.2022 को 11 बजे एक खास तारीख और समय पर उड़ाने की मंशा व्यक्त की गई थी, यदि आरोपी द्वारा पत्र में व्यक्त की गई मांगें पूरी नहीं की गईं।
अब 27 फरवरी को मामले की सुनवाई
अदालत ने कहा, "हालांकि विचाराधीन पदार्थ विस्फोटक अधिनियम, 1884 के तहत 'विस्फोटक' या/और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत 'विस्फोटक पदार्थ' नहीं बनता है, लेकिन संसद भवन को उड़ाने की धमकी देने वाला आरोपी का पत्र आग से संपत्ति को नष्ट करने की धमकी है, जिससे उसे धारा 506 आईपीसी के भाग II के तहत सजा मिल सकती है।" कोर्ट ने सजा पर बहस के लिए मामले को 27 फरवरी को सूचीबद्ध किया है।
सपा नेता हैं किशोर समरीते
बता दें कि किशोर समरीते मध्य प्रदेश के एक पूर्व विधायक और विवादास्पद राजनीतिक शख्सियत हैं। वे मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं। समाजवादी पार्टी (SP) से जुड़े हुए थे। बाद में बसपा में शामिल हो गए थे। समरीते का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है, और वे अपनी राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ कई कानूनी विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहे हैं।
पहले भी रहे विवादों में
समरीते 2004 में बालाघाट के लांजी में हुए एक बड़े विवाद में शामिल थे। इस घटना में एसडीएम कार्यालय में दंगा और आगजनी हुई थी। इस मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मई 2024 में उनकी पांच साल की सजा को बरकरार रखा। हालांकि, अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत लगे आरोपों से उन्हें बरी कर दिया गया।
