INDIA TV के SHE कॉन्क्लेव में दो महिला IPS अफसर, जानिए क्या बोलीं- गरिमा भटनागर और मोनिका भारद्वाज
इंडिया टीवी के शी कॉन्क्लेव में देश की कई दिग्गज महिलाएं शामिल हुईं। इस दौरान एक सत्र में दिल्ली की दो आईपीएस अफसर भी शामिल हुईं। उन्होंने देश में महिलाओं की स्थिति और अपने सफर को लेकर खुलकर बात की।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित इंडिया टीवी SHE कॉन्क्लेव में दिल्ली की दो आईपीएस अफसर गरिमा भटनागर और मोनिका भारद्वाज भी शामिल हुईं। इस दौरान स्पेशल सीपी EOW दिल्ली पुलिस गरिमा भटनागर ने कहा कि किसी को भी खाकी वर्दी से डरने की जरूरत नहीं है। पुलिसवाले भी एक सामान्य इंसान होते हैं, जो वर्दी में रहते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर कोई अपराधी उनसे नहीं डरता है तो वह एक पुलिसकर्मी के रूप में सफल नहीं हैं। एडिशनल सीपी IFSO, दिल्ली पुलिस, मोनिका भारद्वाज से जब पूछा गया कि क्या महिला पुलिसकर्मी पुरुष पुलिसकर्मी की तुलना में ज्यादा खूंखार होती हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि खूंखार शब्द महिलाओं के लिए बना ही नहीं है, लेकिन पुलिस के पेशे में सख्त होना जरूरी होता है, क्योंकि उनके काम के दौरान उन्हें कई ऐसे लोगों का सामना करना पड़ता है, जिनसे सख्ती से पेश आना जरूरी है।
आईपीएस मोनिका भारद्वाज ने कहा कि एक महिला के बारे में आम धारणा यह है कि वह नरम स्वभाव की होती है, लेकिन एक पुलिसकर्मी या लीडर के रूप में महिला या पुरुष होना मायने नहीं रखता है। दोनों के सामने एक समान चुनौतियां आती हैं। हालांकि, महिलाओं से ज्यादा नरम होने की उम्मीद की जाती है। ऐसे में सही फैसले लेना जरूरी होता है। इसमें आपका महिला या पुरुष होना अहमियत नहीं रखता है।
घर से निकलने के बाद सख्त हुई महिलाएं
आईपीएस गरिमा भटनागर ने कहा कि महिलाएं आमतौर पर नरम स्वभाव की होती हैं। वह ज्यादा समझदार होती हैं, लेकिन जब वह घर से बाहर नौकरी करने निकलती हैं तो दुनिया की हकीकत से उनका सामना होता है। इसी वजह से वह समाज के हिसाब से खुद को बदलती हैं और सीखती जाती हैं। इसी कड़ी में महिलाएं जरूरत पड़ने पर सख्त होना भी शुरू करती हैं। समाज भी इस बात को स्वीकार करता है।
परिवार से विरासत में मिले पुलिस के मूल्य
आईपीएस गरिमा भटनागर और मोनिका भारद्वाज ने बताया कि उन दोनों के पिता पुलिस में थे। परिवार के अन्य लोग भी पुलिस की सेवा में थे। परिवार की तरफ से साफ कर दिया गया था कि उन्हें अपना मजबूत करियर बनाना है। ऐसे में उन्होंने आईपीएस बनकर देश की सेवा करने का मौका दिया। आईपीएस मोनिका ने कहा कि एक बार उनके पिता किरण बेदी के साथ फोटो लेकर आए थे। उस पल उन्होंने अपना दिमाग बना लिया था कि उन्हें आईपीएस बनना है।
डीटीसी बस में परेशान हुई थीं आईपीएस गरिमा
आईपीएस गरिमा भटनागर ने बताया कि वह जब कॉलेज में पढ़ती थीं। तब डीटीसी बस आना-जाना करती थीं। बस में कई पुरुष महिलाओं के साथ बदतमीजी करते थे। उनके साथ भी एक बार ऐसी ही घटना हुई। उन्होंने शोर मचाया और बस रुकवा दी। उन्होंने पुलिस को बुलाया, लेकिन पुलिसकर्मी ने उनसे कहा कि मैडम ऐसा होता रहता है। जाने दीजिए। उस पल उन्हें लगा कि अगर वह इस पुलिसकर्मी की सीनियर अफसर होतीं तो बेहतर होता। इसके बाद एक पुलिसकर्मी ने उनके साथ बेवजह सख्ती से बात की थी। इस घटना ने भी उन्हें पुलिस की सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया।
अपनी आवाज उठाएं
आईपीएस गरिमा ने कहा कि जो बोलता है, उसी की आवाज सुनाई देती है, जो चुप रहता है, उसकी आवाज कोई नहीं सुनता। छोटा बच्चा भी जब रोता है, तभी उसकी मां को उसके बारे में पता चलता है। ऐसे में परिजनों को भी अपनी बेटियों को यह सिखाना चाहिए कि वह गलत चीजों का मुखर होकर विरोध करें। बेवजह हंगामा करना गलत है, लेकिन गलत चीजों को कभी भी सहन नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, आईपीएस गरिमा ने कहा कि समय के साथ चीजें बदली हैं। अब महिलाओं के पास अपनी पहचान बताए बिना शिकायत करने का विकल्प है। चीजें तेजी से बदली हैं। अब महिलाएं जिनता आगे आएंगी, उतना बेहतर होगा। एक महिला की चुप्पी 10 महिलाओं के लिए मुश्किलें खड़ी करती है। वहीं, उसके विरोध करने से अन्य महिलाओं की परेशानी पहले ही खत्म हो जाती है।
