नई दिल्लीः भारतीय सेना सिर्फ जंग के मैदान में ही नहीं, बल्कि मेडिकल क्षेत्र में भी अव्वल है। आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के सर्जनों ने दुनिया का पहला हाइड्रस माइक्रोस्टेंट इम्प्लांटेशन किया, जिसे इंट्राऑपरेटिव एक्वस एंजियोग्राफी से गाइड किया गया। इसमें एडवांस्ड सर्जिकल इक्विपमेंट और हीडलबर्ग रेटिना एंजियोग्राफ (HRA) के साथ इमेजिंग का इस्तेमाल किया गया। इस नई तकनीक से इम्प्लांट को सटीक और टारगेटेड तरीके से लगाया जा सकता है, जिससे ग्लूकोमा के मरीजों के लिए नतीजे बेहतर होते हैं।
जानकारी के मुताबिक, ग्लूकोमा सर्जरी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए, आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के सर्जनों ने मोतियाबिंद सर्जरी के साथ-साथ इंट्राऑपरेटिव एक्वस एंजियोग्राफी द्वारा निर्देशित हाइड्रस माइक्रोस्टेंट का विश्व का पहला सफल प्रत्यारोपण किया है।
अस्पताल की तरफ से सामने आई ये जानकारी
यह अभूतपूर्व प्रक्रिया 10 मार्च, 2026 को उन्नत सर्जिकल उपकरणों और हीडलबर्ग रेटिना एंजियोग्राफ (एचआरए) की इमेजिंग तकनीक का उपयोग करके की गई, जिससे तत्क्षण एक्वस आउटफ्लो मार्गों को देखा जा सके। यह नवीन तकनीक श्लेम नहर के भीतर इम्प्लांट को सटीक और लक्षित तरीके से स्थापित करने की सुविधा प्रदान करती है, जिससे एक्वस ड्रेन प्रणाली में सुधार होता है और ग्लूकोमा के रोगियों के लिए बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।
यह उपलब्धि न्यूनतम चीर-फाड़ वाली ग्लूकोमा सर्जरी में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सारिन के नेतृत्व में रक्षा बलों में अत्याधुनिक नेत्र संबंधी नवाचार और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में आधुनिकीकरण को दर्शाता है।