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Hindi News एजुकेशन "किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिला, पेरेंट्स सपोर्टिव होने बहुत जरूरी", 'SHE' कॉन्क्लेव में UPSC टॉपर जिनिया अरोड़ा

"किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिला, पेरेंट्स सपोर्टिव होने बहुत जरूरी", 'SHE' कॉन्क्लेव में UPSC टॉपर जिनिया अरोड़ा

India TV द्वारा आयोजित 'SHE' कॉन्क्लेव में सोमवार को UPSC टॉपर Zinnia Arora शामिल हुईं। आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा।

'SHE' कॉन्क्लेव में UPSC टॉपर जिनिया अरोड़ा- India TV Hindi 'SHE' कॉन्क्लेव में UPSC टॉपर जिनिया अरोड़ा

India TV की ओर से SHE कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया,  जिसमें UPSC टॉपर Zinnia Arora ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिला। पेरेंट्स सपोर्टिव होने बहुत जरूरी हैं। अपनी मां से मुझे प्रेरणा मिली।पढ़ाई के समय लगता है कि सबकुछ किताबों में है। उन्होंने कहा कि मेरी मां मेरा आदर्श हैं। हर लड़की को अपॉर्चुनिटी नहीं मिलती। अच्छी अपॉर्चिनिटी के बिना बड़े सपने नहीं देख सकते। विकसित भारत के लिए हर किसी को विकसित होना होगा। 

उन्होंने कहा कि परिवार में सबसे बड़ी होने के कारण, उन्हें अपनी इच्छाओं और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच बैलेंस बनाना पड़ता था, जो अक्सर मुश्किल होता था। उन्होंने कहा कि UPSC एग्जाम की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ना कोई आसान फैसला नहीं था, लेकिन अपनी मां से मिली हिम्मत ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की। भले ही भविष्य अनिश्चित लग रहा था।

Image Source : India Tv'SHE' कॉन्क्लेव में UPSC टॉपर Zinnia Aurora

जिनिया ने करियर में पैशन की अहमियत के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि जब लोगों को अपने काम में स्पार्क महसूस नहीं होता, तो रोजमर्रा के कामों में खुशी महसूस करना मुश्किल हो जाता है। अपनी जर्नी शेयर करते हुए, उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा से सोशल डेवलपमेंट में इंटरेस्ट रहा है। इसी इंटरेस्ट ने उन्हें लोगों की मदद करने पर फोकस करने वाले इनिशिएटिव शुरू करने के लिए मोटिवेट किया, और उनके चेहरों पर मुस्कान देखकर उन्हें बहुत खुशी मिली। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व महसूस हुआ जब एक अखबार ने उन्हें “हरियाणा की बेटी” कहा। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहचान समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती है।

'हर इंसान के चैलेंज अलग-अलग'

वर्क प्लेस पर चैलेंज को लेकर जिनिया ने कहा कि हर इंसान के चैलेंज अलग-अलग। जिनिया ने कहा कि मैं तो शुरू से ही रिबेल रही हूं। रिबेल का ये मतलब नहीं है कि आपके लिए रूल बनाए गए हैं आप उसे तोड़ना चाहते हैं। लेकिन वो आपके लिए बंदिशें बना देते हैं। चाहे वो एक तरह की नौकरी लेना हो, चाहे वो लड़की की नौकरी नहीं होती लड़के होती है, ये कहना हो। चाहे वो ये हो कि 12वीं तक पढोगी, मास्टर्स नहीं करोगी, ये सब केजेस हैं जो लगा दी जाती हैं। इनको तोड़ने के लिए एक ऐसा जुनून चाहिए, जिसे सोसाइटी कभी-कभी रिबेल बोल देती है। रिबेल जिसमें वो केज को तोड़ रही है और अपने आपको रिलीज कर रही है जिसमें वो अपने आपको खुश देख पा रही है तो वो रिबेल गलत नहीं है।

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