नई दिल्ली:- भारतीय सिनेमा संगीत को अंतर्राष्ट्रीय जगत पर पहचान दिलाने वाले प्रतिभाशाली संगीतरकार ए.आर.रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 में तमिलनाडु में हुआ था। रहमान के पिता आर.के शेखर मलयालम फिल्मों मे संगीत दिया करते थे। उसी कारण बचपन में ही रहमान का रुझान संगीत की ओर काफी ज्याद बढ़ गया था। संगीत और उनका रुझान देखते हुए रहमान के पिता ने उन्हें संगीत सीखने के लिए प्रेरित किया।
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महज 6 वर्ष के रहमान 'की बोर्ड', 'हारमोनियम' पर इतनी खूबसूरत धूम बनाना सीख गए थे कि जो भी उस धुन को सुनता था वह मुग्ध ही हो जाता। इसके कुछ वक्त के बाद ही रहमान के सिर से पिता का साया उठ गया, लेकिन उन्होंने हार न मानते हुए अपने संगीत का रियाज़ जारी रखा। कुछ वक्त बाद उनकी बहन की तबियत भी खराब हो गई जिसके बाद सभी डॉक्टर्स ने कह दिया था कि उनकी बहन के बचने की कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने अपनी बहन के लिए मंदिर, मस्जिद जाकर खूब दुआएं मांगी और आखिरकार उनकी दुआ कुबूल हुई। इसके बाद रहमान ने इस्लाम धर्म अपना लिया और वह ए.एस.दिलीप कुमार से अल्लाह रखा रहमान बन गए।
कई बड़े और नामी संगीतकारों के साथ काम करने के बाद वर्ष 1992 में उनकी मुलाकात मणि रत्नम से हुई जो अपनी फिल्म 'रोजा' के निर्देशन में व्यस्त थे। इस फिल्म के म्यूजिक के लिए उन्हें किसी संगीतकार की तलाश थी और रहमान से मुलाकात के बाद मणि रत्नम ने अपनी फिल्म में उनके संगीत को पेश किया जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया था। इस फिल्म के लिए रहमान को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के रूप में राष्ट्रीय पुरुस्कार से नवाजा गया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और जिस भी फिल्म के लिए रहमान ने संगीत दिया है उसे श्रोताओं से वाह वाही ही हासिल हुई है।
आज उनके 49वें जन्मदिन पर हम ए.आर. रहमान ऐसे ही कुछ नग्मों के बारे में करने जा रहे हैं जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।
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