लेकिन सबसे बड़े राज़ से पर्दा उठना अभी बाकी है-
सवाल ये है कि एक हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा करने के लिए यादव सिंह ने अपनी काली कमाई में से किस-किस तक हिस्सा पहुंचाया था।यूपी के वो कौन-कौन नेता थे। जिनकी शह पर यादव सिंह बरसों से मलाई खा रहा था। य़ूपी के वो कौन से अफसर थे- जिन तक यादव सिंह का चढ़ावा पहुंचता था।
पूरे सिस्मट को करप्ट करने वाले वो कौन-कौन बड़े और रसूखदार लोग हैं जिन तक हिस्सा पहुंचाकर यादव सिंह करोड़ों-अरबों के वारे-न्यारे कर रहा था। सवाल ये भी है कि एक हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा करने के लिए यादव सिंह ने अपने सियासी सरपरस्तों के साथ मिलकर कितने घोटालों को अंजाम दिया होगा। क्या कभी उन घोटालों का भंडाफोड़ हो पायेगा-जिनके बूते पर महाभ्रष्ट चीफ इंजीनियर यादव सिंह ने खरबों का गोलमाल किया- और ब्लैकमनी का किंग बन बैठा।
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