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मां बनने के बाद भी सार्थक भूमिकाएं संभव : ऋचा

चेन्नई: 'कौन है जो सपनों में आया' और 'कुछ तुम कहो कुछ हम कहें' जैसी हिंदी फिल्मों में अभिनय कर चुकीं अभिनेत्री ऋचा पल्लोद आगामी तमिल-तेलुगू फिल्म 'यागवराईनुम ना काक्का' से अर्से बाद दक्षिण भारतीय

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मां बनने के बाद भी सार्थक भूमिकाएं संभव : ऋचा

चेन्नई: 'कौन है जो सपनों में आया' और 'कुछ तुम कहो कुछ हम कहें' जैसी हिंदी फिल्मों में अभिनय कर चुकीं अभिनेत्री ऋचा पल्लोद आगामी तमिल-तेलुगू फिल्म 'यागवराईनुम ना काक्का' से अर्से बाद दक्षिण भारतीय फिल्मों में वापसी कर रही हैं। वह मानती हैं कि मां बनने के बाद भी सार्थक भूमिकाएं निभाई जा सकती हैं। ऋचा पिछली बार तमिल फिल्म 'समथिंग समथिंग..उनाक्कुम उनाक्कुम' (2006) में नजर आई थीं।

उन्होंने आईएएनएस को बताया, "मैं उस अवधारणा को तोड़ना चाहती हूं कि जब एक अभिनेत्री मां बन जाती है, तो वह सिर्फ कुछ गिनी-चुनी भूमिकाएं ही कर सकती है। मेरे ख्याल से मां बनने के बाद भी सार्थक फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई जा सकती हैं। 'यागवराईनुम..' में मेरी भूमिका इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।"

ऋचा ने कहा, "अगर कोई दो बच्चों की मां जेनिफर लोपेज(गायिका-अभिनेत्री) को पसंद कर सकता है, जो अभी भी दमदार और स्वतंत्र भूमिकाएं निभा सकती हैं, तो उन भारतीय अभिनेत्रियों के साथ ऐसा क्यों नहीं हो सकता, जो मांएं हैं?"

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