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शशि कपूर को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

नई दिल्ली: प्रख्यात फिल्म अभिनेता शशि कपूर को वर्ष 2014 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसकी घोषणा सोमवार को की गई। शशि कपूर ने इसी महीने अपना 77वां जन्मदिन मनाया। भारतीय

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नई दिल्ली: प्रख्यात फिल्म अभिनेता शशि कपूर को वर्ष 2014 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसकी घोषणा सोमवार को की गई।

शशि कपूर ने इसी महीने अपना 77वां जन्मदिन मनाया। भारतीय सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें 46वें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

77 साल के शशि कपूर ये पुरस्कार पाने वाले 46वें व्यक्ति हैं। भारत सरकार ये पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास में उल्लेखनीय जोगदान के लिए देती है।

शशि कपूर "दीवार", "सत्यम शिवम सुंदरम", "त्रिशूल" और "कभी कभी" जैसी फ़िल्मों में यादगार भूमिकाओं के लिए याद किए जाते हैं।

ख़बर मिलते ही उनके भतीजे और मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर ने ट्वीट किया "हां! शशि कपूर को भारतीय सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दादा साहब फालके सम्मान मिल रहा है। बहुत खूब चाचा, आप पर भगवान की कृपा बने रहे।"

उन्होंने आगे लिखा "कपूर ख़ानदान को तीन पद्म भूषण और तीन फालके पुरस्कार। इसके पहले पृथ्वीराज कपूर और राज कपूर को भी फ़ालके पुरस्कार मिल चुका है।"

शशि कपूर का जन्म 1938 में हुआ था। वह स्वर्गीय राज और शम्मी कपूर के छोटे भाई हैं।

उन्होंने चार साल की उम्र में ही अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के नाटकों में अभिनय करना शुरु कर दिया था।

40 के दशक में उन्होंने फ़िल्मों में काम करना शुरु कर दिया। वाल कलाकार के रुप में  "आग" (1948) और "अवारा" (1951) उनकी यादगार फ़िल्में हैं। इन फ़िल्मों में उन्होंने  अपने बड़े बाई राज कपूर के बचपन की भूमिका की थी।

बतौर हीरो "धर्मपुत्र" उनकी पहली फ़िल्म थी जो 1961 में आई थी। इसके बाद उन्होंने   100 से ज़्यादा हिंदी फ़िल्मों में काम किया।

शशि कपूर देश से बाहर की पिल्मों में काम करने वाले अभिनेतों में से एक हैं। उन्होंने "दि हाउसहोल्डर" (1963), "शैक्सपियर वाला" (1965), "बॉम्बे टॉकी" (1970) और "हीट एण्ड डस्ट"(1982) जैसी फिल्मों में किया।

1978 में शशि कपूर ने अपनी फ़िल्म कंपनी फिल्म वाला खोली। इस कंपनी के बैनर तले "जुनून" (1978), "कलयुग" (1981), "36चौरंगी लैन" (1981), "विजेता" (1982) और "उत्सव" (1984) जैसी फिल्में बने जो बोहद सराही गईं।

 

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