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सुनील दत्त की 10 अनसुनी बातें !

नयी दिल्ली :भारतीय फिल्म जगत में महारत हासिल कर बालीवुड में अपनी सफलता का झंडा गाड़ने वाले विख्यात अभिनेता सुनील दत्त ने अपने अभिनय से सबके दिलों पर तकरीबन चार दशक तक राज किया। और

10) सुनील दत्त के सिने करियर पर नज़र डालने पर पता लगता है कि वह मल्टी स्टारर फिल्मों का अहम हिस्सा रहे है। ऐसी फिल्मों में फिल्म निर्माताओं के लिए सुनील दत्त पहली प्राथमिकता रहे है। सुनील दत्त की मल्टीस्टारर सुपरहिट फिल्मों में 'नागिन', 'जानी दुश्मन', 'शान', 'बदले की आग', 'राज तिलक', 'काला धंधा गोरे लोग', 'वतन के रखवाले', 'परंपरा', 'क्षत्रिय' आदि प्रमुख हैं। संजय दत्त की वजह से सूनील दत्त काफी परेशान रहते थे। संजय दत्त के ड्रग्स लेने की आदत से वो काफी तनावग्रस्त रहा करते थे। सुनील दत्त उन्हें इलाज के लिए अमरीका में एक नशा उन्मूलन केंद्र में ले गए जहां लंबे इलाज के बाद संजय दत्त ने ड्रग्स को अलविदा कहा और दोबारा बॉलीवुड में काम शुरु किया।

नर्गिस दत्त की म्रत्यू के बाद सुनील दत्त पूरी तरह टूट गये थे और फिर कुछ दिनों बाद वो राजनीति में आ गये और मनमोहन सिंह की सरकार में 2004 से 2005 तक वो खेल एवं युवा मामलों के कैबिनेट मंत्री बने। 1984 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर मुम्बई उत्तर पश्चिम लोक सभा सीट से उन्होंने चुनाव जीता और सांसद बने। भारत सरकार ने 1968 में उन्हें पद्म श्री सम्मान प्रदान किया। इसके अतिरिक्त वे बम्बई के शेरिफ़ भी चुने गये। वे यहां से लगातार पांच बार चुने गए। 25 मई 2005 को दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में उनकी मृत्यू हो गयी।

सुनील दत्त और नरगिस - दोनों पति पत्नी ने मिलकर "अजन्ता आर्ट्स कल्चरल ग्रुप" नाम से एक सांस्कृतिक संस्था का निर्माण बहुत पहले ही कर लिया था। इस संस्था के माध्यम से वे फिल्म निर्माण से लेकर राष्ट्र व लोक कल्याण के कार्य निरन्तर करते रहे। 1981 में यकृत कैंसर से पीड़ित हुई उनकी पत्नी नरगिस दत्त की मृत्यु के बाद सुनील दत्त ने "नरगिस दत्त मैमोरियल कैंसर फाउण्डेशन" की स्थापना की। इतना ही नहीं, प्रति वर्ष उनकी स्मृति में "नरगिस अवार्ड" भी देना प्रारम्भ किया। सुनील दत्त की मृत्यू के बाद अब उनकी बेटियां व बेटा मिलकर यह काम संभाल रहे है।

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