मुंबई: पाश्र्वगायक सुरेश वाडकर ने विश्व स्तर पर संगीत प्रेमियों तक पहुंचने के लिए अजीवसन संगीत अकादमी की ऑनलाइन लांचिंग की है। अजीवसन संगीत अकादमी की शुरुआत गुरुजी आचार्य जियालाल वसंत ने 1932 में श्रीनगर में की थी, जिनसे वाडकर ने संगीत की शिक्षा ली थी। कुछ सालों बाद 1986 में अकादमी का स्थानांतरण मुंबई में हो गया और वाडकर ने इसका प्रभार संभाला था।
अब शुक्रवार, 15 मई को आचार्य जियालाल की जयंती के मौके पर इसका ऑनलाइन संस्करण लांच किया गया है।
वाडकर ने आईएएनएस को बताया, "अजीवसन मेरे गुरु का सपना था। मुझे हमारे पोर्टल 'डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट अजीवसन डॉट कॉम' की लांचिंग की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।"
उन्होंने कहा, "हम नई प्रौद्योगिकी में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें हम वैश्विक पहुंच बना सकते हैं। अजीवसन हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विरासत को विश्व में सुलभ बनाने की उम्मीद करता है।"
इस नए पोर्टल का उद्देश्य दूरस्थ शिक्षा के लिए ऑनलाइन संगीत शिक्षा उपलब्ध कराना है। इससे यह उन छात्रों के लिए भी सुलभ हो जाएगी, जो पारंपरिक कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो सकते।
अकादमी में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के तहत गायन और वादन (तबला, सितान, हारमोनियम, वायलिन) का प्रशिक्षण दिया जाता है। कथक के प्रमाणपत्र के लिए यह इलाहाबाद की प्रयाग संगीत समिति से संबद्ध है।
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के अलावा अकादमी कीबोर्ड, पियानो और गिटार तथा अन्य वाद्ययंत्रों के साथ सुगम संगीत और पश्चिमी संगीत में भी प्रशिक्षण देती है।
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